MP News: बेतवा को प्रदूषण मुक्त करने चल रही साइंटिफिक प्लानिंग, सीवेज-उद्योगों का जहरीला पानी रोका जाएगा

बेतवा को प्रदूषण मुक्त करने चल रही साइंटिफिक प्लानिंग, सीवेज-उद्योगों का जहरीला पानी रोका जाएगा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। राज्य सरकार नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा नदी की सहायक बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन पर काम करने जा रही है। इसके लिए नदी की सफाई ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजना के जरिए बेतवा नदी तंत्र को पुनर्जीवित करने की वैज्ञानिक योजना बनाई जा रही है। योजना और डीपीआर बनाने के लिए बुधवार को भोपाल में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। बेतवा नदी के लिए व्यापक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए इंजीनियरों को तकनीकी पहलुओं पर फोकस चर्चा की गई।

नमामि गंगे परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बेतवा नदी का उद्गम रायसेन जिले के जंगलों में स्थित झिरी में है। लेकिन उद्गम के बाद भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों में यह नदी प्रदूषण फेल रहा। भोपाल की कलियासोत नदी और बेतवा का संगम भोजपुर के पास होता है, जहां नदी की स्थिति काफी खराब है। वहीं मंडीदीप के पास बेतवा का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढक गया है। ऐसे में इन तीनों जिलों में बेतवा के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है।

कलियासोत नदी से लेकर बेतवा नदी में मिलने वाले सीवेज को रोकने और प्रदूषण कम करने के लिए तीनों जिलों के नगरीय निकायों के इंजीनियरों को विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंडीदीप में उद्योग लगने के बाद से अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है। इसके कारण उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे बेतवा नदी में मिल रहा है। इसका असर नदी के साथ-साथ आसपास की खेती पर भी पड़ रहा है। सरकार की कोशिश है कि बेतवा की धारा निर्मल और अविरल बनाई जा सके।

नमामि गंगे मिशन गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास करने के लिए चलाया जा रहा है। मिशन, मप्र के गंगा बेसिन के 34 जिलों और 283 शहरी निकायों तक फैला है। इसमें चंबल, बेतवा, सिंध, काली सिंध, धसान, केन, क्षिप्रा, गंभीर, टोंस, सोन और पावती जैसी 11 प्रमुख नदियां शामिल हैं।

Created On :   3 July 2026 12:05 AM IST

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