Gadchiroli News: भामरागढ़ के कुक्कामेठा नाले पर बना लकड़ी का पुल, सुलझेगी ग्रामीणों की समस्या

Gadchiroli News जहां बारिश के दिनों में नदी-नालों पर पुल नहीं होने से गांवों का संपर्क टूट जाता है, वहां मुश्किलों के आगे घुटने टेकने के बजाय आदिवासी ग्रामीणों ने खुद रास्ता निकालने की मिसाल पेश की है। न आधुनिक मशीनें, न इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण और न ही किसी बड़ी व्यवस्था का सहारा। केवल आपसी एकजुटता, श्रमदान और वर्षों के अनुभव के बल पर तहसील के लष्कर गांव के आदिवासी ग्रामीणों ने लाहेरी से महज पांच किमी दूर कुक्कामेठा नाले पर लकड़ी का पुल तैयार किया है।
जंगल में उपलब्ध लकड़ी, बांस और रेत का इस्तेमाल कर ग्रामीणों ने अपनी जरूरत के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाया। भामरागढ़ तहसील के अनेक गांवों में बारिश के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित हो जाता है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और लंबे समय तक विकास कार्यों में आई बाधाओं के कारण कई स्थानों पर आज भी स्थायी पुलों की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण केवल सरकारी व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय स्तर पर विकल्प तलाशते हंै।
बारिश के दौरान नालों में पानी का तेज बहाव होने से निर्माण कार्य करना मुश्किल होता है। इसलिए अक्टूबर-नवंबर में पानी का प्रवाह कम होने के बाद ग्रामीण एकजुट होकर श्रमदान से बांस और लकड़ी के पुल तैयार करते हैं। कुक्कामेठा नाले पर बने इस पुल के पीछे केवल लकड़ी और बांस नहीं, बल्कि पीढ़ियों से विकसित स्थानीय ज्ञान और अनुभव भी है। नाले की स्थिति, पानी के बहाव और उपलब्ध संसाधनों को समझकर ग्रामीण सामूहिक रूप से काम करते हंै। हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देता है और सभी के प्रयासों से रास्ता तैयार होता है। औपचारिक शिक्षा या इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण नहीं होने के बावजूद प्रकृति का निरीक्षण, व्यावहारिक समझ और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेने की उनकी क्षमता इस पहल में दिखाई देती है।
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