Gadchiroli News: वैनगंगा और पोहर नदी के संगम में मछुआरों के जाल में फंसी दुर्लभ मछली

वैनगंगा और पोहर नदी के संगम में मछुआरों के जाल में फंसी दुर्लभ मछली
वैनगंगा व पोहर नदी के संगम में मिली दक्षिण अमेरिका में पायी जाने वाली ‘हेलिकॉप्टर फिश’

Gadchiroli News जिले की वैनगंगा और पोहर नदी के संगम में मछली पकड़ने गए मछुआरों के जाल में एक दुर्लभ मछली मिलने से इलाके में कौतूहल फैल गया। तलोधी (मो) के भोई समाज के मछुआरों को नियमित मछली पकड़ने के दौरान यह मछली मिली। उसकी पहचान ‘कैटफिश’, ‘हेलिकॉप्टर फिश’ या ‘सेलफिन फिश’ के रूप में बताए जाने के बाद मछुआरों ने उसे सुरक्षित जाल से बाहर निकाला और जीवित अवस्था में वैनगंगा नदी में छोड़ दिया।

बता दें कि, गांव के मछुआरे जब वैनगंगा और पोहर नदी के संगम क्षेत्र में मछली पकड़ रहे थे, तभी उनके जाल में यह अलग तरह की मछली फंस गई। मछली का रंग काला था। उसके शरीर के ऊपरी हिस्से पर कांटेदार संरचना और पीठ पर लंबे, कांटेदार पंख जैसे उभार दिखाई दे रहे थे। उसका असामान्य रूप देखकर मछुआरे भी हैरान रह गए।

मछली के संबंध में जानकारी जुटाने के बाद उसके दक्षिण अमेरिका के नदी क्षेत्रों में पाए जाने की बात सामने आई। मछली पकड़ते समय काशीनाथ सखाराम मेश्राम, मुकरू कुकसू शेरकी, भाऊराव भोयर और प्रवीण गेडाम सहित भोई समाज के मछुआरे मौजूद थे। उन्होंने मछली को जाल से सावधानीपूर्वक बाहर निकाला और उसे मारने या बेचने के बजाय वैनगंगा नदी के प्रवाह में छोड़ दिया। मछुआरों के इस कदम से दुर्लभ मछली को जीवनदान मिला। गौरतलब है कि, नदी में मिली मछली की वास्तविक प्रजाति और उसके स्थानीय जलक्षेत्र में पहुंचने के कारणों का पता लगाने के लिए मत्स्य विशेषज्ञों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

वैनगंगा में मछलियों की अनेक प्रजातियां : मछली पकड़ने का कार्य करने वाले प्रवीण गेडाम और मुखरू शेरकी के अनुसार वैनगंगा नदी में मीठे पानी की 40 से अधिक प्रजातियों की मछलियां पाई जाती है। इनमें रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प, घोगर, जरंग, मुरल, शिंगट, वाम, सिंगी, शिवड़ा, वाडगुर, मांगुर, झींगा और चिलापी सहित कई प्रजातियां शामिल हंै। स्थानीय बाजार में इनमें से कई मछलियों की अच्छी मांग रहती है। ऐसे में वैनगंगा और पोहर नदी के संगम पर इस असामान्य मछली का मिलना चर्चा का विषय बन गया है।


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