मत युद्ध: उठता सवाल - सीएम के गोमांस खाने के आरोप से वोट बढ़ते हैं या बिगड़ेंगे, चुनाव नियमों की कसौटी पर है विधानसभा क्षेत्र

Guwahati News. प्रकाश दुबे। चुनाव प्रचार के दौरान गोमांसभक्षी कहना या मियां जिंदाबाद कहना आचरण संहिता के विरुद्ध है या कानूनन अपराध? असम के चुनाव में निर्वाचन आयोग और पुलिस प्रशासन को इस प्रश्नों का उत्तर देना पड़ सकता है। राजधानी का सेंट्रल गुवाहाटी विधानसभा क्षेत्र चुनाव नियमों की कसौटी पर है। दो प्रमुख उम्मीदवार हैं- भाजपा की ओर से विजय कुमार गुप्ता और उनका मुकाबला कर रही हैं कांग्रेस की कुंकी चौधरी।
गुप्ता 35 साल से अटल बिहारी वाजपेयी के संपर्क का दावा करते हैं। ब्रह्मकुमारियों के संगठन सहित दर्जन भर सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं। कुंकी विदेश से उच्चशिक्षा प्राप्त हैं। दोनों ही पहली मर्तबा चुनाव मैदान में हैं।
दोनों ने एक-दूसरे के विरुद्ध कोई अशालीन, अश्लील, घटिया फब्ती नहीं कसी। इसके बावजूद बखेड़ा खड़ा हो गया है।
गुप्ता के प्रचार की शुरुआत केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। नितीन गडकरी जैसे केन्द्रीय मंत्री ने प्रचार किया। मुख्यमंत्री हिमांत विश्व शर्मा- जिन्हें असमिया में बिस्वा सरमा पुकारते हैं, ने जिताने की अपील करते हुए कह दिया कि कुंकी की मां गोमांस का भक्षण करती हैं। मां सुजाता गुरंग ने शालीनता से इतना ही कहा- चुनाव मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए। सोशल मीडिया में आग लगी। सवाल उठा कि किसी नागरिक के खानपान को चुनाव प्रचार में मुद्दा बनाकर भावनाएं आहत करना सही है या गलत? कुंकी ने आज पानबाजार क्राइम ब्रांच साइबर सेल थाने में भाजपा की आईटी सेल के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई है। सुजाता के पिता यानी उम्मीदवार कुंकी के नाना स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय थे। संविधान सभा के सदस्य रहे।
भाजपा उम्मीदवार गुप्ता ने इस बारे में राय देने से बचते हुए इतना ही कहा- मुख्यमंत्री वगैरह बड़े लोग हैं। वे जो कहें, ठीक होगा ही कहते होंगे। वे समझ रहे हैं कि प्रचार में नई परेशानी आन पड़ी है। इस खतरे को शायद अमित भाई ताड़ गए। आल इंडिया डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट एआईडीयूएफ के सर्वेसर्वा और मुंबई के बड़े इत्र निर्यातकों में शामिल बदरुद्दीन अजमल ने प्रचार सभा में दो बातें कहीं। पहली यह कि अगली सरकार हमारी बैसाखी के बगैर नहीं बन सकती। दूसरे उन्होंने प्रचार सभा में मियां जिंदाबाद के नारे लगवाए। असम में मियां उन मुसलमानों को कहा जाता है, जो बांग्लादेशी मूल के हैं। भाजपा के पचार में उन्हें घुसपैठिया माना जाता है। मामला तूल प्रकड़ गया। युवा ड्राइवर बनजीत राय का कहना है कि सर्वानंद सोनोवाल संभल कर बोलते हैं।
मुख्यमंत्री हिमांत बेधड़क हैं, लेकिन उनकी लोकप्रियता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरह कुछ जगह हिमांत अपने को मामा पुकारते हैं। कुछ महिलाओं ने सार्वजनिक स्थल पर उन्हें चूम लिया। एक और मुद्दा बना। तेजपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मानते हैं कि बैठे बिठाए इस विवाद से नुकसान का अंदेशा जिस तेजी से केन्द्रीय नेतृत्व ने भांपा, प्रदेश नेता नहीं समझे। हिंदू-मुसलमान के बजाय यह एक ही समुदाय में तनातनी का मामला बनता नजर आ रहा है।
ध्यान बंटाने की इस कोशिश में अजमल बहुत कामयाब नहीं हुए। नगांव के डेका मानते हैं कि भाजपा ने चुनाव से पहले ही एआईडीयूएफ को संभाल लिया है। अजमल की पार्टी के बांग्लादेश से सटे लोअर असम समेत 25 स्थानों पर उम्मीदवार खड़े हुए हैं। असम गण परिषद के 13 अजमल की पार्टी से आकर भाजपा के सहयोगी के रूप में मैदान में हैं। ज्योर्तिमय हजारिका डिब्रूगढ़ के अनुभवी पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि असम सदियों से बहुभाषी और विविधता भक्षी राज्य है।
अहोम समुदाय सन 1228 में चूं काफा के नेतृत्व में असम में आया था। उनकी उम्फा पूजा में बछड़े की बलि देने की परंपरा रही है। इसलिए मुख्यमंत्री का कथन विवादास्पद बन गया। पिछले तीन दिन से असम के अधिकांश जिलों के केन्द्रीय पर्यवेक्षक राज्य के जिलों में बैठकें ले रहे हैं। अनेक चुनावी अनुभव संपन्न एक पर्यवेक्षक ने आज कहा कि हमारा मुख्य काम चुनाव प्रक्रिया को निर्दोष तरीके से संपन्न कराना है। फिर भी किसी कथन या आचरण की शिकायत आती है तो उस पर ध्यान दिया जाता है।
Created On :   5 April 2026 5:36 PM IST












