Jabalpur News: पीजी शुरू होने की बाट जोह रहा 55 वर्ष पुराना आयुर्वेद कॉलेज

पीजी शुरू होने की बाट जोह रहा 55 वर्ष पुराना आयुर्वेद कॉलेज
कॉलेज प्रबंधन ने एनसीआईएसएम के समक्ष किया आवेदन, अगले माह हो सकती है यूजी और पीजी के लिए विजिट

डिजिटल डेस्क,जबलपुर। कहने को तो गौरीघाट स्थित शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में बीएएमएस स्नातक यूजी की 75 सीटें हैं और हमेशा ही ये फुल हो जाती हैं परंतु 1971 से संचालित कॉलेज को 55 वर्ष होने को हैं पर स्नातकोत्तर एमडी, एमएस पीजी कोर्स की कमी अब भी बनी हुई है। एक ओर जहां एनसीआईएसएम द्वारा आयुर्वेद में सुपरस्पेशिलिटी चिकित्सा की पढ़ाई की चर्चा है, वहीं शासकीय आयुर्वेद कॉलेज अब भी पीजी के लिये बाट जोह रहा है।

जानकारी के अनुसार मप्र में सात शासकीय आयुर्वेद कॉलेज जबलपुर, भोपाल, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर, बुरहानपुर व इंदौर में हैं जिनमें केवल भोपाल, ग्वालियर, रीवा व उज्जैन में पीजी संचालित है। नेशनल कमीशन फॉर इण्डियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन नई दिल्ली ( एनसीआईएसएम) को संस्था की तरफ से प्रतिवर्ष पीजी के लिये आवेदन भी कुछ वर्षों से भेजा जाता रहा है लेकिन टीचिंग फैकल्टी सहित अन्य कारणों के अभाव में यह प्रारंभ नहीं हो सका है, हालांकि प्रबंधन ने आगामी सत्र के लिए भी आवेदन किया है।

उम्मीद की जा रही है कि इस बार यूजी के साथ पीजी की सीटें भी कॉलेज को मिलेंगी। इसके लिए एनसीआईएसएम का निरीक्षण संभवत: अगले माह हो सकता है। कॉलेज में इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं।

छात्रों का आर्थिक भार होगा कम

सूत्र बताते हैं कि निजी आयुर्वेद कॉलेजों में आयुर्वेद पीजी की फीस प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख रुपये पड़ती है। यानी तीन वर्षों की फीस और रहने-खाने का खर्च मिलाकर पूरी डिग्री तक लगभग बीस से पच्चीस लाख रु. खर्च होते हैं, जबकि शासकीय कॉलेज में लगभग दो लाख फीस लगती है और प्रतिमाह स्टायपेण्ड कम से कम 52 से 60 हजार रुपये भी शासन की तरफ से मिलता है, ऐसे में शासकीय स्तर पर पढ़ाई से छात्रों का आर्थिक भार कम हो जाएगा।

आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी

कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. पंकज मिश्रा के अनुसार पीजी के आवेदन के जुड़ी प्रक्रिया हो गई है। संभवत: इस बार पीजी की सीट मिलेंगी। कॉलेज के द्वारा द्रव्य गुण विज्ञान, संहिता एवं मौलिक सिद्धांत और रचना शरीर जैसे 3 विषयों के अंतर्गत 18 सीटों के लिए अप्लाई किया गया है। यूजी की 75 सीटों के साथ पीजी की 18 सीटों के लिए भी विजिट आने वाले माह में हो सकती है।

फैकल्टी की नियुक्ति से 5 विषय में हो सकता है पीजी

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पांडेय के अनुसार एनसीआईएसएम के मापदण्डानुसार पीजी हेतु 3:2:1 यानी तीन असिस्टेंट प्रोफेसर, दो एसोसिएट व एक प्रोफेसर की अनिवार्यता है।

ऐसे में शासन द्वारा जबलपुर में केवल 15 अतिरिक्त टीचर्स की नवीन नियुक्तियां जिनमें पचास फीसदी हायर फैकल्टी यानी प्रोफेसर्स व एसोसिएट प्रोफेसर्स तथा पचास फीसदी लेक्चरर यानी असिस्टेंट प्रोफेसर्स शामिल हों, तो संभावना है कि पांच विषयों में पीजी प्रारंभ हो सकता है। जानकारों का कहना है कि इससे बड़े पैमाने पर छात्रों को फायदा होगा।

Created On :   23 March 2026 5:46 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story