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Jabalpur News: अब 2500 नहीं, बल्कि 4 हजार करोड़ से 80 फीट चौड़ा होगा मण्डला-चिल्पी हाईवे

- एनएचएआई इसका प्रोजेक्ट बनाकर केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय भेजेगा
- प्रशासकीय स्वीकृति के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी
- कंसल्टेंट अपॉइंट होने के बाद इसकी विस्तृत डीपीआर तैयार हो सकेगी।
Jabalpur News: जबलपुर से मण्डला चिल्पी रायपुर हाईवे में 150 किलोमीटर सड़क को फोरलेन बनाने का प्लान है। हाईवे के इस हिस्से को फोरलेन बनाने की घोषणा बीते दिनों की गई, अब इसका प्रोजेक्ट तैयार करने की कवायद आरंभ हुई है। नेशनल हाईवे अथाॅरिटी ऑफ इण्डिया के अधिकारियों के अनुसार इस हाईवे को 2500 करोड़ से अपग्रेड कर फोरलेन करने की घोषणा हुई, लेकिन सड़क लगभग 4 हजार करोड़ की राशि से फोरलेन बन सकेगी।
इसमें भी कई स्तरों पर मंजूरी की जरूरत होगी। पहले इसकी प्रशासकीय अनुमति व बजट संबधी प्रस्ताव के साथ कई स्तरों पर प्रपोजल को स्वीकृत किया जाएगा, तब कहीं जाकर इसके बनने की नौबत आएगी। एनएचएआई जल्द इसका प्रस्ताव बनाकर केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय भेजगा। इसमें सड़क की मौजूदा स्थिति सहित सभी तरह के बिंदुओं को समाहित किया जाएगा।
सड़क की मौजूदा दशा ऐसी
जबलपुर से मण्डला, चिल्पी तक इस हाईवे की कुल लंबाई 176 किलोमीटर है। बरेला तक इस हाईवे का हिस्सा अब रिंग रोड के दायरे में है, जिससे 26 किलोमीटर का हिस्सा अब हाईवे से बाहर हो चुका है। अब नागाघाटी डोबी गांव से इसका जीरो पॉइंट है। बरेला से मण्डला, चिल्पी तक सड़क में पहला हिस्सा नागाघाटी से मण्डला की सीमा तक 63 किलोमीटर मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट काॅर्पोरेशन के पास है।
इससे आगे यानी मण्डला से चिल्पी तक 87 किलोमीटर का हाईवे नेशनल हाईवे अथाॅरिटी ऑफ इण्डिया के पास है। सड़क पहले और दूसरे हिस्से में किसी भी तरह से हाईवे मापदण्डों के अनुसार नहीं बनी है।
बनने से छग जाना आसान होगा
जबलपुर से मण्डला, चिल्पी घाटी, कवर्धा, बिलासपुर, रायपुर तक जाने में अभी सड़क संकरी और खराब होने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। टू-लेन सड़क हाईवे के मापदण्डों के अनुसार नहीं बनी है। इस सड़क के फोरलेन बनने से छग की राजधानी रायपुर और बिलासपुर जाना आसान हो सकेगा। अपग्रेडेट सड़क छग जाने वालों की परेशानियों को कम कर सकती है। इसके बनने से मध्य प्रदेश और छग में सड़क संपर्क बेहतर हो सकता है।
वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बोर्ड से एनओसी लेनी होगी
इस हाईवे में जो जंगल हैं उसमें कुछ हिस्सा कान्हा का भी आता है, जिसमें किसी भी तरह के निर्माण को लेकर अनुमति पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से लेनी होगी। इसमें वर्क के नियम अलग होंगे। अंडर पास, एलिवेटेड काॅरिडोर सहित कई तरह के प्रावधानों के बाद वन भूमि में निर्माण की अनुमति मिल सकेगी। निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा ताे मध्य प्रदेश सरकार की जो भूमि होगी, उसमें निर्माण की अनुमति राज्य शासन देगा। कंसल्टेंट अपॉइंट होने के बाद इसकी विस्तृत डीपीआर तैयार हो सकेगी।
Created On :   29 Aug 2025 5:29 PM IST