फॉरेंसिक जांच में हुआ बड़ा पर्दाफाश: महाराष्ट्र साइबर ने ट्रेस किए खाते - सीजेपी प्रदर्शनों पर देश विरोधी डिजिटल अटैक, सीमा पार से रची जा रही थी अशांति की साज़िश

महाराष्ट्र साइबर ने ट्रेस किए खाते - सीजेपी प्रदर्शनों पर देश विरोधी डिजिटल अटैक, सीमा पार से रची जा रही थी अशांति की साज़िश
  • महाराष्ट्र साइबर ने 500 से ज़्यादा खाते पकड़े, पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट से चलाए जा रहे थे सोशल मीडिया हैंडल
  • महाराष्ट्र साइबर ने 500 से ज़्यादा खाते पकड़े
  • मेटा, एक्स और यूट्यूब को दिए गए 429 आपत्तिजनक पोस्ट और खाते तुरंत ब्लॉक करने के निर्देश
  • भीड़ दिखाने और नफरत फैलाने के लिए एआई और डीपफेक का सहारा
  • पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के साइबर हैंडलरों की नापाक करतूत

Mumbai News. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आड़ में देश का माहौल बिगाड़ने और जनभावनाओं से खिलवाड़ करने की एक बेहद खतरनाक और सुनियोजित अंतर्राष्ट्रीय साइबर साजिश का महाराष्ट्र पुलिस ने पर्दाफाश किया है। राज्य में डिजिटल सुरक्षा और साइबर अपराधों पर लगाम कसने वाली नोडल एजेंसी महाराष्ट्र साइबर ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए 500 से अधिक ऐसे सोशल मीडिया खातों और नेटवर्क को बेनकाब किया है, जो सीमा पार से भारत विरोधी प्रोपेगेंडा चला रहे थे। जांच अधिकारियों के अनुसार, ये भारत विरोधी तत्व देशव्यापी सीजेपी प्रदर्शनों का फायदा उठाकर न सिर्फ आम जनता को भड़का रहे थे, बल्कि फर्जी कंटेंट, डीपफेक वीडियो और नकली तस्वीरों के जरिए कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने की फिराक में थे।


पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के साइबर हैंडलरों की नापाक करतूत

महाराष्ट्र साइबर के इस व्यापक और आक्रामक निगरानी अभियान ने साफ कर दिया है कि देश के भीतर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को भुनाने के लिए विदेशी धरती से किस कदर डिजिटल हमला बोला जा रहा था। तकनीकी जांच, ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस, मेटाडेटा एनालिसिस और बिहेवियरल ट्रैकिंग में सामने आया है कि इन 500 खातों का बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से संचालित हो रहा था। असामाजिक और भारत-विरोधी तत्वों ने बाकायदा एक नेटवर्क बनाकर भारतीय सोशल मीडिया यूज़र्स को टारगेट किया। उनका एकमात्र मकसद भ्रामक नैरेटिव गढ़ना, झूठी अफवाहें फैलाना और देश के भीतर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना था।

एआई और डीपफेक का घातक हथियार की तरह इस्तेमाल

  • इस प्रोपेगेंडा की सबसे खौफनाक बात यह रही कि इसमें साधारण फर्जी खबरों के बजाय अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीपफेक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। महाराष्ट्र साइबर की स्टेट-ऑफ-द-आर्ट फॉरेंसिक लैब ने जब इन पोस्ट्स का वैज्ञानिक परीक्षण किया, तो कई रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे हुए।
  • डिजिटल भीड़ का छलावा - तस्वीरों और वीडियो में एआई टूल्स का इस्तेमाल करके कृत्रिम रूप से भारी भीड़ दिखाई गई, ताकि ऐसा लगे कि विरोध प्रदर्शन बेकाबू हो चुका है और लोग उग्र हो रहे हैं।
  • वॉइस क्लोनिंग और मैनिपुलेटेड वीडियो - देश की प्रमुख हस्तियों और राजनेताओं के चेहरों पर एआई-जनरेटेड वीडियो चिपकाए गए। इतना ही नहीं, सिंथेटिक वॉइस और ऑडियो क्लोनिंग तकनीक के जरिए नेताओं की आवाज में भड़काऊ और फर्जी बयान तैयार कर वायरल किए गए।
  • फॉरेंसिक जांच में 140 से अधिक ऐसी पोस्ट और प्रोफ़ाइल पाई गईं, जहां एआई तकनीक का इस्तेमाल सीधे-सीधे जनता को गुमराह करने और देश में दंगे जैसी स्थिति पैदा करने के लिए किया जा रहा था।


टेक दिग्गजों को अल्टीमेटम, 429 पोस्ट और हैंडल तुरंत हटाने का आदेश

साज़िश की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र साइबर ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने बिना कोई वक्त गंवाए कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले इन साइबर अपराधियों के खिलाफ सीधी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम) एक्स (ट्विटर) और गूगल (यूट्यूब) जैसे प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों को तुरंत प्रभाव से नोटिस जारी किए गए हैं। महाराष्ट्र साइबर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चिन्हित किए गए सभी 429 आपत्तिजनक पोस्ट और संबंधित हैंडल्स को भारतीय डिजिटल स्पेस से तुरंत ब्लॉक और डिलीट किया जाए। जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि डिजिटल स्पेस को देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। चाहे साजिश देश के भीतर से रची जा रही हो या सीमा पार पाकिस्तान से, साइबर स्पेस पर हर देशविरोधी हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। एजेंसी 24 घंटे हर प्लेटफार्म पर पैनी नजर रख रही है और शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वाले हर खाते को नेस्तनाबूद किया जाएगा।

Created On :   27 July 2026 10:12 PM IST

Tags

Next Story