सीबीआई का शिकंजा: तेजस एक्सप्रेस में रिश्वत का खेल, पीएनबी के एटीएम से अधिकारी के खाते में पहुंची 4 लाख की घूस

तेजस एक्सप्रेस में रिश्वत का खेल, पीएनबी के एटीएम से अधिकारी के खाते में पहुंची 4 लाख की घूस
  • पेंडिंग बिल पास कराने के एवज में मांगी रिश्वत
  • आईआरसीटीसी अफसर समेत 3 के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज किया केस
  • आईआरसीटीसी से हरी झंडी मिलते ही सीबीआई का शिकंजा

Mumbai News. भारतीय रेलवे की खानपान एवं पर्यटन इकाई आईआरसीटीस के वेस्ट जोन (मुंबई) कार्यालय में एक हैरान करने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। पेंडिंग बिल क्लीयर कराने के बदले रिश्वत की रकम सीधे पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की एटीएम मशीन के जरिए अधिकारी के बैंक खाते में जमा कराई गई। केंद्रीय जाँच ब्यूरो(सीबीआई) की मुंबई एंटी करप्शन ब्रांच ने इस पूरे खेल का भंडाफोड़ करते हुए आईआरसीटीसी के वरिष्ठ अधिकारी, कैटरिंग कंपनी के निदेशक और एक बिचौलिए के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है।

पेंडिंग बिल पास कराने के एवज में मांगी रिश्वत

सीबीआई को मिले विश्वसनीय इनपुट्स के अनुसार, अराहा हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. (कोलकाता) को नवंबर 2025 में अहमदाबाद-मुंबई और लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस ट्रेनों में ऑन-बोर्ड कैटरिंग सेवाओं का ठेका मिला था। नियम के मुताबिक, तेजस ट्रेनों में यात्रियों के भोजन का शुल्क टिकट के किराए में ही जुड़ा होता है, जिसका भुगतान बाद में कैटरिंग ठेकेदार आईआरसीटीसी को बिल प्रस्तुत करके क्लेम करता है। अप्रैल 2026 में जब कंपनी के निदेशक अमर ठक्कर अपने पेंडिंग बिलों को पास कराने के सिलसिले में आईआरसीटीसी के वेस्ट जोन कार्यालय पहुंचे तो वहां तैनात वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी त्रिदिब बनर्जी ने बिलों को जल्द क्लीयर कराने का भरोसा दिया। हालांकि, इस प्रशासनिक मदद के एवज में उन्होंने अवैध रूप से रिश्वत की मांग की।

एटीएम मशीन से बैंक खाते में भेजी गई घूस

जांच में सामने आया कि घूस का लेन-देन छिपाने और काम जल्दी कराने के लिए एक अलग तरीका अपनाया गया। अधिकारी ने रिश्वत की रकम सीधे अपने पीएनबी के बैंक खाते में जमा कराने का निर्देश दिया, जिसके तहत-

पहली किस्त - 21 अप्रैल 2026 को अमर ठक्कर के कहने पर मुंबई स्थित उनके परिचित दीपक परमार ने पीएनबी की एटीएम मशीन से 4 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 1,98,500 नकद अधिकारी त्रिदिब बनर्जी के बैंक खाते में जमा कराए।

दूसरी किस्त - जून 2026 में जब कंपनी के नए बिल दोबारा जमा किए गए, तो अधिकारी ने फिर से काम कराने के बदले पैसे मांगे। इसके बाद 8 जून 2026 को दीपक परमार ने दोबारा पीएनबी के एटीएम से 4 ट्रांजैक्शन करके 2,00,000 नकद अधिकारी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए। दोनों किस्तों को मिलाकर कुल लगभग 4 लाख रुपये की घूस सीधे अधिकारी के खाते में पहुंचाई गई।

आईआरसीटीसी से हरी झंडी मिलते ही सीबीआई का शिकंजा

क्योंकि आरोपी एक लोक सेवक हैं, इसलिए सीबीआई ने कानून के तहत कार्रवाई से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के अंतर्गत नई दिल्ली आईआरसीटीसी मुख्यालय अनुमति प्राप्त की। सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिलते ही सीबीआई ने मुंबई एंटी करप्शन ब्रांच में प्राथमिकी दर्ज कर ली। आरोपियों की पहचान त्रिदिब बनर्जी, अमर ठक्कर, दीपक परमार व अन्य अज्ञात व्यक्ति के रूप में हुई है। सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7, 7-A, 8 और 12 के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले की आगे की विस्तृत जांच जारी है।

Created On :   23 July 2026 9:40 PM IST

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