बॉम्बे हाई कोर्ट: चिट फंड निवेशकों से धोखाधड़ी का मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का दिया निर्देश

  • ठाणे सेशन कोर्ट ने 50 से 60 निवेशकों के साथ 39 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी में आरोपियों को किया था बरी
  • गोल्ड किट्टी पार्टी' के नाम पर चिट फंड में निवेशकों से धोखाधड़ी का मामला

डिजिटल डेस्क, मुंबई. बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘गोल्ड किट्टी पार्टी' के नाम पर चिट फंड में 50 से 60 निवेशकों के साथ 39 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में ठाणे सेशन कोर्ट को मुख्य आरोपी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि मुख्य शिकायतकर्ता ने क्रॉस-एग्जामिनेशन में कुछ राशि नकद मिलने या सामान मिलने की बात कही है, लेकिन अभियोजन द्वारा जांचे गए 14 में से 12 निवेशकों ने गवाही दी है कि उन्हें उनका पैसा वापस नहीं मिला है। ऐसे में आरोपी के खिलाफ आईपीसी के अपराधों (धोखाधड़ी और विश्वासघात) के मामले में नए सिरे से विचार करने की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति एम. एम. साथये की एकल पीठ ने राज्य सरकार की याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि ‘गोल्ड किट्टी पार्टी' की ओर से जारी की गई रसीदों पर यह छपा था कि राशि किसी विशेष महीने के लिए ‘गोल्ड बुकिंग' के एवज में प्राप्त की गई है और उस पर "बचत और ढेर सारा मजा’ का टैगलाइन भी था। इस स्तर पर यह आसानी से स्वीकार नहीं किया जा सकता कि निवेशकों को रिफंड या रिटर्न का कोई वादा नहीं किया गया था।

पीठ ने कहा कि मुख्य आरोपी राजवीर नवरत्न शर्मा के पास आरोपी करिश्मा मनोज पुनमीया एक कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि निवेशकों से एकत्र किए गए धन से उसे कोई मौद्रिक लाभ हुआ था। इसलिए आईपीसी के तहत भी उसकी बरी को बरकरार रखा गया है।

पीठ ने पाया कि क्या है पूरा मामला

ठाणे सेशन कोर्ट ने 30 अगस्त 2023 को आदेश में दोनों आरोपियों को महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण अधिनियम, 1999 (एमपीआईडी अधिनियम) की धारा 3 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420, 406 सहपठित धारा 109 के तहत आरोपों से बरी कर दिया गया था। राज्य सरकार ने इस बरी किए जाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

Created On :   11 Oct 2026 8:37 PM IST

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