सुप्रीम कोर्ट: शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह धनुष-बाण मामले में शिंदे गुट ने कहा - चुनाव आयोग ने शिवसेना संविधान के आधार पर लिया फैसला

  • शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ मामले पर गुरुवार को भी सुनवाई हुई
  • 2018 के संविधान में कई बातों का उल्लंघन किया गया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना पार्टी और चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ मामले पर गुरुवार को भी सुनवाई हुई । मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिंदे गुट के अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के पास शिवसेना का 2011 का संविधान है, 2018 का नहीं। ऐसे में आयोग ने मौजूद संविधान के आधार पर फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि 2018 के संविधान में कई बातों का उल्लंघन किया गया है। कौल ने आपत्ति जताई कि शिवसेना में नियुक्तियों लोकतांत्रिक आधार पर नहीं की गईं, पार्टी प्रमुख असीमित शक्तियां दी गईं।

वरिष्ठ अधिवक्ता कौल ने यह दावा करते हुए कि शिवसेना के काम करने का तरीका और नियुक्तियां पार्टी के अंदर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रही थीं। उन्होंने कहा कि आयोग ने 1998 में एक पत्र में शिवसेना को बताया था कि पार्टी के अंदर नियुक्तियां लोकतांत्रिक सिद्धांत के आधार पर नहीं की जा रही हैं। आयोग ने साफ कर दिया था कि हर पार्टी अपने काम करने का तरीका खुद तय करें और संविधान में उसका ज़िक्र करे और किसी भी बदलाव को पार्टी की आम बैठक में मंजूरी मिलनी चाहिए। शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को ‘प्रतिनिधि सभा’ के सदस्य चुनते हैं। यह पार्टी के अंदर लोकतंत्र के खिलाफ है। क्योंकि इसमें सबसे निचले और आखिरी कार्यकर्ता का ध्यान नहीं रखा जाता।

शिंदे गुट के अधिवक्ता ने कहा कि 2018 के संविधान के हिसाब से कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या 13 होनी चाहिए थी, पिछले पत्र व्यवहार के हिसाब से सिर्फ़ 9 सदस्यों के नाम थे। यह भी पारदर्शिता की कमी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आयोग ने बताया था कि लाखों कार्यकर्ताओं वाली पार्टी में सिर्फ़ 9 सदस्यों की कार्यकारिणी बहुत कम संख्या है। कौल ने कहा कि एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुटों के बीच मतभेद सिर्फ़ विधायी दल तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि राजनीतिक दल के तक पहुंच गए थे। उन्होंने जून 2022 में दोनों गुटों की अलग-अलग बैठक, विधायी दल के नेता और चीफ व्हिप की अलग-अलग नियुक्तियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधायी दल और राजनीतिक दल के बीच एक अटूट रिश्ता है।

Created On :   8 Oct 2026 9:02 PM IST

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