त्रिकोणीय मुकाबले!: विधान परिषद की 5 सीटों पर सियासी रण तेज, बगावत ने बढ़ाई प्रमुख दलों की चिंता

विधान परिषद की 5 सीटों पर सियासी रण तेज, बगावत ने बढ़ाई प्रमुख दलों की चिंता
  • पुणे शिक्षक सीट से अमरावती शिक्षक तक बहुकोणीय मुकाबला
  • नागपुर में भाजपा के सामने अपने ही पूर्व विधायक की चुनौती
  • संभाजीनगर में भी बागी उम्मीदवारों ने बिगाड़े समीकरण

डिजिटल डेस्क, मुंबई. महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव का रण अब पूरी तरह सज चुका है। नामांकन दाखिल करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद पांचों चुनाव क्षेत्रों में मुकाबले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। पुणे शिक्षक, पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक, अमरावती शिक्षक और संभाजीनगर स्नातक सीटों पर प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के साथ बागियों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी ताल ठोक दी है। इससे कई सीटों पर मुकाबला सीधे दो दलों के बीच न रहकर बहुकोणीय होता दिखाई दे रहा है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन वापसी के बाद ही साफ होगी, लेकिन फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा पुणे शिक्षक और स्नातक, नागपुर स्नातक तथा अमरावती शिक्षक सीट पर हुई बगावत को लेकर है। बागी उम्मीदवार यदि मैदान में बने रहते हैं तो इसका सीधा असर प्रमुख दलों के वोट बैंक पर पड़ सकता है।

पुणे शिक्षक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

पुणे शिक्षक सीट से भाजपा ने कौस्तुभ गावड़े को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से जयंत आसगावकर चुनाव लड़ रहे हैं। इसी बीच शिवसेना (शिंदे) के मंगेश चिवटे ने भी नामांकन दाखिल कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इसके अलावा सचिन सानप ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है। भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना (शिंदे) के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। पुणे शिक्षक सीट को लेकर महायुति के भीतर सीट बंटवारे को लेकर पहले से ही खींचतान की चर्चा थी। ऐसे में चिवटे की उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला और नामांकन वापसी के बाद वे मैदान में रहते हैं या नहीं, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

पुणे स्नातक सीट पर राकांपा (अजित) को बगावत की चुनौती

पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की स्मिता जाधव के सामने राकांपा (शरद) की हर्षदा देशमुख-जाधव प्रमुख उम्मीदवार हैं। लेकिन राकांपा (अजित) के भैय्या माने ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर पार्टी के सामने ही चुनौती खड़ी कर दी है। इसके अलावा पूर्व विधायक दत्ता सावंत ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है। इससे मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है। यदि बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में बने रहते हैं तो विपक्षी वोटों में विभाजन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा के सामने अपने ही पूर्व विधायक की चुनौती

नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा के सुधाकर कोहले और कांग्रेस के अभिजीत वंजारी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। लेकिन भाजपा के पूर्व विधायक अनिल सोले ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। सोले की बगावत को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उनका राजनीतिक प्रभाव और संगठन में पुराना संपर्क चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। इस वजह से नागपुर में मुकाबला केवल भाजपा बनाम कांग्रेस तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।

अमरावती शिक्षक सीट पर सबसे ज्यादा घमासान

पांचों सीटों में अमरावती शिक्षक सीट पर मुकाबला सबसे ज्यादा बहुकोणीय नजर आ रहा है। कांग्रेस की अदिति पोहरे, उद्धव गुट के दत्तात्रय लहाने और शिवसेना (शिंदे) के किरण सरनाईक प्रमुख दावेदारों में हैं। इसके साथ ही विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ के दिलीप कडू और शिवसेना (शिंदे) के पूर्व विधायक श्रीकांत देशपांडे ने भी नामांकन दाखिल किया है। भाजपा से जुड़े कई दावेदारों के नामांकन ने इस सीट के समीकरणों को और जटिल कर दिया है।

संभाजीनगर स्नातक में भी बिगड़े समीकरण

संभाजीनगर स्नातक सीट पर राकांपा (अजित) के सतीश चव्हाण और उद्धव गुट के दिलीप घुगे के बीच प्रमुख मुकाबला माना जा रहा है। लेकिन भाजपा नेता एम. के. देशमुख के नामांकन से भाजपा की भी इस चुनाव में सक्रिय मौजूदगी दिखाई दे रही है। दूसरी ओर राकांपा (शरद) के प्रताप सिंह पाटील ने भी नामांकन दाखिल किया है। ऐसे में इस सीट पर भी प्रमुख दलों के वोटों के विभाजन की संभावना बढ़ गई है।

अब नजर नामांकन वापसी पर

पांचों सीटों पर नामांकन दाखिल होने के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर नामांकन वापसी की अंतिम तारीख पर है। बागी उम्मीदवारों को मनाने और उन्हें मैदान से हटाने के लिए दलों की ओर से प्रयास तेज होने की संभावना है। विधान परिषद की इन पांच सीटों पर चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है, बल्कि महायुति और महाविकास आघाडी के बीच जमीनी ताकत, संगठनात्मक पकड़ और वोट ट्रांसफर की क्षमता की भी परीक्षा माना जा रहा है।

Created On :   6 Oct 2026 10:24 PM IST

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