बॉम्बे हाई कोर्ट: शिवसेना शिंदे गुट की रूपाली अमोल जाधव को राहत नहीं, दूसरे मामले में सुनवाई को मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना व्यक्ति को पड़ा भारी

शिवसेना शिंदे गुट की रूपाली अमोल जाधव को राहत नहीं, दूसरे मामले में सुनवाई को मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना व्यक्ति को पड़ा भारी
  • कुणबी मराठा ओबीसी के फर्जी जाति प्रमाणपत्र का मामला
  • अदालत ने जाति समीक्षा समिति और कलेक्टर के जाधव को अयोग्यता घोषित करने के आदेशों को रखा बरकरार
  • बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई को मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना व्यक्ति को पड़ा भारी, 10 हजार रुपए का लगाया जुर्माना

डिजिटल डेस्क, मुंबई. बॉम्बे हाई कोर्ट से ‘कुणबी' मराठा ओबीसी के फर्जी जाति प्रमाणपत्र के मामले में शिवसेना के शिंदे गुट की रूपाली अमोल जाधव को नहीं राहत मिली है। अदालत ने महाराष्ट्र के खोपोली नगर पालिका की नगरसेविका जाधव के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) ‘कुणबी' मराठा होने के दावे को खारिज कर दिया और रायगढ़ के जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति और कलेक्टर के जाधव को अयोग्य घोषित करने के आदेशों को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति आर. आई. छागला और न्यायमूर्ति फिरदौश पी. पूनीवाला की पीठ ने रूपाली काशीनाथ शिगवण उर्फ रूपाली अमोल जाधव की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सतर्कता सेल की रिपोर्ट जांच समिति के लिए केवल सहायता के रूप में होती है और यह समिति पर बाध्यकारी नहीं है। समिति को संदिग्ध दस्तावेजों की पुनर्जांच कराने का पूरा अधिकार है। याचिकाकर्ता के पिता के स्कूल रिकॉर्ड में जाति ‘हिंदू मराठा' पाई गई और दादा के 1932 के जन्म रिकॉर्ड (फॉर्म 14) में ओवरराइटिंग एवं हेरफेर किया गया था। पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता ने फर्जी दस्तावेज पेश किए और वंशावली में अजनबी व्यक्ति को रिश्तेदार दिखाकर धोखाधड़ी की कोशिश की। ऐसे में याचिकाकर्ता किसी भी अदालती राहत या नए दस्तावेज जमा करने के अवसर की हकदार नहीं हैं। हालांकि संशोधित अधिनियम के तहत अपील का प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक ओबीसी वर्ग के लिए कोई स्पष्ट एसओपी या नियम तैयार नहीं किए हैं। पीठ ने सरकार को जल्द से जल्द नियम या एसओपी बनाने का सुझाव दिया। कानून के अनुसार जाति प्रमाण पत्र रद्द होते ही चुनाव परिणाम निरस्त माना जाता है। पीठ ने जाधव के खिलाफ जाति समीक्षा समिति और कलेक्टर के अयोग्यता संबंधी आदेशों को सही ठहराया है। रुपाली जाधव ने ‘कुणबी' मराठा ओबीसी जाति के प्रमाण पत्र के आधार पर खोपोली नगरपालिका चुनाव में वार्ड नंबर 8 से नगरसेवक का चुनाव जीता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत गुट) के उम्मीदवार यश रमेश जाधव की शिकायत पर रायगढ़ की जिला जाति प्रमाण पत्र जांच समिति ने 10 अगस्त 2026 के आदेश में उनके जाति प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया। इसके आधार पर कलेक्टर रायगढ़ ने 18 अगस्त 2026 को उन्हें नगरसेवक पद से अयोग्य घोषित कर दिया। रुपाली जाधव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जांच समिति और कलेक्टर के आदेशों को रद्द करने और अपने जाति प्रमाण पत्र को वैध ठहराने की मांग की थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई को मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना व्यक्ति को पड़ा भारी, 10 हजार रुपए का लगाया जुर्माना

उधर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई को मोबाइल से रिकॉर्डिंग करना व्यक्ति को भारी पड़ गया। अदालत ने व्यक्ति की इस हरकत को स्वत:संज्ञान लेते हुए उस पर न केवल 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया, बल्कि उसकी मोबाइल को जब्त करते हुए न्यायालय की अवमानना सहित कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि न्यायालय की कार्यवाही सार्वजनिक रूप से देखी जा सकती है, लेकिन बिना पूर्व लिखित अनुमति उसके ऑडियो या वीडियो की रिकॉर्डिंग करना वैध नहीं है। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी तथा न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले ने अदालत की कार्यवाही के दौरान दिलीप वाघ के मोबाइल से रिकॉर्डिंग का स्वत:संज्ञान लेते हुए कहा कि पूर्व लिखित अनुमति के बिना न्यायालय की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग करना प्रतिबंधित है। लाइव-स्ट्रीमिंग और न्यायालय की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग संबंधी नियमों के अनुसार अनधिकृत व्यक्ति न्यायालय की कार्यवाही को रिकॉर्ड, साझा या प्रसारित नहीं कर सकता। पीठ ने माना कि याचिकाकर्ता आचरण न्यायालय की अवमानना संबंधी कार्रवाई को आकर्षित कर सकता है। हालांकि दिलीप वाघ द्वारा क्षमा-याचना किए जाने के कारण न्यायालय ने उसकी क्षमा स्वीकार कर ली, लेकिन उसे बिना शर्त स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि भविष्य में यदि वह पुनः ऐसी हरकत करता है या न्यायालय की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग संबंधी प्रतिबंध का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई और न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है। 5 अक्टूबर 2026 को न्यायालय की कार्यवाही के दौरान लगभग दोपहर 12.23 बजे न्यायालय के अंतिम पंक्ति में बैठे एक व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन दिखाई दिया, जिसका फ्लैश चालू था। न्यायालय को संदेह हुआ कि वह व्यक्ति न्यायालय की कार्यवाही का वीडियो बना रहा है। उस व्यक्ति की पहचान दिलीप वाघ के रूप में हुई, जो शिक्षा निरीक्षक के कार्यालय में कार्यरत है। पकड़े जाने के बाद दिलीप वाघ ने अपने मोबाइल से वीडियो हटाने का प्रयास किया और वीडियो वास्तव में हटा भी दिया, लेकिन सूचना-प्रौद्योगिकी विभाग ने उसे मोबाइल के हटाए गए तत्वों से पुनः प्राप्त कर लिया। उसके द्वारा ऐसा करने का उद्देश्य क्या था, यह स्पष्ट नहीं है।

Created On :   6 Oct 2026 10:02 PM IST

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