भाजपा पर निशाना: गर्जना मोर्चे में ठाकरे बंधुओं का शक्ति प्रदर्शन, चुनाव प्रक्रिया और जातिगत जनगणना पर सियासत

गर्जना मोर्चे में ठाकरे बंधुओं का शक्ति प्रदर्शन, चुनाव प्रक्रिया और जातिगत जनगणना पर सियासत
  • लंबे अंतराल के बाद एक मंच पर आए उद्धव-राज ठाकरे, एसआईआर रद्द करने की मांग
  • उद्धव बोले- देश किसी एक व्यक्ति का नहीं, राज ने कहा- चुनाव बहिष्कार के बिना सच सामने नहीं आएगा
  • कांग्रेस का ओबीसी दांव: जातिगत जनगणना और आरक्षण की 50% सीमा बढ़ाने की मांग

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई में रविवार को आयोजित गर्जना मोर्चे में लंबे समय बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची में कथित बदलाव और एसआईआर को लेकर केंद्र सरकार व भाजपा पर निशाना साधा। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि चुनाव बहिष्कार के बिना सच सामने नहीं आएगा। वहीं, शिवसेना (उद्धव) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि देश किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है और नागरिकता से जुड़े फैसले चुनाव आयुक्त के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं हैं।

राज ठाकरे ने कहा कि वह 2017-18 से चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठा रहे हैं और इस संबंध में सोनिया गांधी तथा ममता बनर्जी से भी चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में किसे बैठाना है, इसका फैसला मतदाताओं को करना चाहिए, चुनाव आयोग को नहीं। उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मोर्चे में कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार) गुट के नेता भी शामिल हुए। अनिल देशमुख, शशिकांत शिंदे, बालासाहेब थोरात और विजय वडेट्टीवार ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। हालांकि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने पलटवार करते हुए कहा कि एसआईआर का विरोध करने वाले दलों को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या घुसपैठिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तय करेंगे और क्या एक मतदाता को एक से अधिक स्थानों पर मतदान की अनुमति होनी चाहिए।

इसी बीच कांग्रेस ने ओबीसी मुद्दे को लेकर जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाया। प्रदेश प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने सबसे पहले जाति आधारित जनगणना की मांग की और उनके दबाव के बाद केंद्र ने इसे लेकर निर्णय घोषित किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बढ़ाने की मांग की। विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि ओबीसी समाज को अपेक्षित अधिकार नहीं मिले हैं। नेताओं ने कहा कि विभिन्न समाजों की वास्तविक संख्या सामने आने के बाद ही प्रतिनिधित्व और आरक्षण से जुड़े विवादों का प्रभावी समाधान संभव होगा।

Created On :   4 Oct 2026 10:24 PM IST

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