बड़ा कदम: महाराष्ट्र को भिखारी मुक्त बनाने की तैयारी, सरकार बनाने जा रही है जिला स्तर पर एक्शन प्लान

महाराष्ट्र को भिखारी मुक्त बनाने की तैयारी, सरकार बनाने जा रही है जिला स्तर पर एक्शन प्लान
  • इंदौर पैटर्न अपनाने की अन्न आयोग की सिफारिश
  • महाराष्ट्र को भिखारी मुक्त बनाने की तैयारी

Mumbai News. महाराष्ट्र को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए राज्य सरकार संगठित कदम उठाने जा रही है। महाराष्ट्र राज्य अन्न आयोग ने इस दिशा में विस्तृत रिपोर्ट और सिफारिशें जारी करते हुए सरकार को कई ठोस उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि राज्य में खाद्य सुरक्षा योजनाएं लागू होने के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षा मांगने वालों की संख्या बढ़ना चिंता का विषय है, जिससे राज्य की छवि भी प्रभावित हो रही है। आयोग ने कहा कि मध्यप्रदेश के इंदौर में कानून का कड़ाई से पालन, जनजागृति व पुनर्वसन कर भिख मांगने पर काफी हद तक रोक लगाने में सफलता मिली है।

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क्या है सरकार की योजना?

हर जिले के जिलाधिकारी को “भिक्षा मांगने वालों की संख्या शून्य करने” का लक्ष्य दिया जाएगा। इसके लिए विशेष एक्शन प्लान तैयार होगा।

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1. भिक्षावृत्ति पर सख्त कार्रवाई

भिक्षा मांगने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें उनके मूल राज्य/स्थान पर भेजने की व्यवस्था होगी।

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2. सर्वे और पहचान अभियान

आशा वर्कर, आंगनवाड़ी और ग्रामसेवकों की मदद से घर-घर सर्वे किया जाएगा ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे।

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3. सरकारी योजनाओं से जोड़ना

भिक्षा मांगने वालों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

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4. पुनर्वास और रोजगार

भिक्षावृत्ति छोड़ने वालों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, स्वरोजगार प्रशिक्षण व एनजीओ के सहयोग से पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।

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5. जनजागृति

अगर बायोमेट्रिक सिस्टम काम नहीं करता, तो वैकल्पिक पहचान प्रणाली लागू की जाएगी ताकि कोई लाभार्थी छूटे नहीं। इसके अलावा राज्यभर में भीख मत दो, पुनर्वास में सहयोग करो” अभियान चलाया जाएगा।

बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मंदिर और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर प्रचारित किए जाएंगे।

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आयोग ने क्या खामियां बताईं?

• कई पात्र लोग योजनाओं से वंचित हैं

• बायोमेट्रिक सिस्टम में दिक्कत

• पुनर्वास कार्यक्रम प्रभावी नहीं

• जिला स्तर पर निगरानी कमजोर

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कानूनी आधार

आयोग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 और भिक्षावृत्ति प्रतिबंध कानून का हवाला देते हुए कहा कि भीख मांगना और देना दोनों दंडनीय हैं।

Created On :   11 April 2026 9:45 PM IST

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