सदन: त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भक्तों से अवैध वसूली रोकने पास व्यवस्था लागू, कोल्हापुर के हेरे सरंजाम इनाम की जमीनें अब बिना शुल्क बदल सकेंगे

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भक्तों से अवैध वसूली रोकने पास व्यवस्था लागू, कोल्हापुर के हेरे सरंजाम इनाम की जमीनें अब बिना शुल्क बदल सकेंगे
  • 55 साल पुराना विवाद खत्म: कोल्हापुर के हेरे सरंजाम इनाम की जमीनें अब बिना शुल्क बदल सकेंगे
  • त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भक्तों से अवैध वसूली रोकने पास व्यवस्था लागू

Mumbai News. विधान परिषद में प्रदेश के विधि व न्याय विभाग के राज्य मंत्री आशीष जयस्वाल ने स्पष्ट करते हुए कहा कि नाशिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भक्तों से अवैध रूप से पैसे की वसूली रोकने के लिए अधिकृत पास की व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर में सामान्य भक्तों के दर्शन के लिए शुल्क लागू नहीं है। लेकिन किसी भक्तों को एक- दो घंटे में जल्दी दर्शन करना है तो ऐसे लोगों के लिए 200 रुपए की पास सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा वीआईपी दर्शन के लिए 2500 रुपए शुल्क लागू किया गया है। दर्शन पास सुविधा के लिए पोर्टल बनाया गया है। साथ ही ऑफलाइन भी दर्शन पास सुविधा शुरू है। बुधवार को प्रश्नकाल में शिवसेना (उद्धव) के विधायक सुनील शिंदे ने वीआईपी दर्शन के नाम पर भक्तों से अवैध रूप से वसूली को लेकर सवाल पूछा था। इसके जवाब में जयस्वाल ने कहा कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर के एक ट्रस्टी को भक्तों से अवैध रूप से पैसे वसूलने को लेकर गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा त्र्यंबकेश्वर मंदिर के सुरक्षा कर्मी और हरियाणा के एक भक्त से मारपीट की घटना हुई थी। इसलिए पास व्यवस्था लागू की गई है।

55 साल पुराना विवाद खत्म: कोल्हापुर के हेरे सरंजाम इनाम की जमीनें अब बिना शुल्क बदल सकेंगे

उधर राज्य सरकार ने कोल्हापुर जिले के चंदगढ़ तहसील स्थित हेरे गांव की सरंजाम इनाम जमीनों से जुड़े करीब 55 साल पुराने विवाद का समाधान कर दिया है। सरकार ने विशेष मामले के रूप में इन भोगवटादार वर्ग-2 जमीनों को बिना किसी रूपांतरण शुल्क (कन्वर्जन चार्ज) के भोगवटादार वर्ग-1 में बदलने की मंजूरी दे दी है। यह जानकारी राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में दी। मंत्री ने बताया कि हेरे सरंजाम इनाम की करीब 11 हजार 394 हेक्टेयर जमीन को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव लंबे समय से सरकार के विचाराधीन था। हालांकि, वर्ष 1951 के मूल रिकॉर्ड, गांव के अभिलेख, सातबारा उतारे और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण जमीनों को वर्ग-1 में बदलने की प्रक्रिया अटकी हुई थी। इसके चलते हजारों किसानों को वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। बावनकुले ने कहा कि जमीनें भोगवटादार वर्ग-2 में होने के कारण किसानों को बैंकों से ऋण लेने और केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। किसानों की परेशानी को देखते हुए सरकार ने विशेष निर्णय लेते हुए रूपांतरण शुल्क और नजराना पूरी तरह माफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस फैसले के तहत सरकार ने 54.11 लाख रुपये की वसूली भी माफ कर दी है, जिससे किसानों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। राजस्व मंत्री ने कहा कि भविष्य में जमीन के रिकॉर्ड को लेकर यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है तो उसके समाधान के लिए उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति अभिलेखों से जुड़े मामलों की जांच कर उनका निपटारा करेगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से हजारों किसानों को राहत मिलेगी, उन्हें बैंक ऋण आसानी से मिलेगा और वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी बिना किसी बाधा के उठा सकेंगे।

Created On :   1 July 2026 10:03 PM IST

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