बॉम्बे हाई कोर्ट: 14 दिसंबर को गिरगांव चौपाटी पर क्रिसमस संगीत समारोह की मिली इजाजत, सोसाइटी के वरिष्ठ सदस्यों से रिकवरी आदेश रद्द

14 दिसंबर को गिरगांव चौपाटी पर क्रिसमस संगीत समारोह की मिली इजाजत,  सोसाइटी के वरिष्ठ सदस्यों से रिकवरी आदेश रद्द
  • प्रभु येशु जन्मोत्सव सामाजिक संस्था की ओर से समारोह का आयोजन
  • संस्था को गिरगांव चौपाटी के 15000 वर्ग मीटर क्षेत्र में क्रिसमस संगीत समारोह आयोजित करने की मिली अनुमति

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने सार्वजनिक संस्था प्रभु येशु जन्मोत्सव को 14 दिसंबर को गिरगांव चौपाटी पर क्रिसमस संगीत समारोह आयोजित करने की इजाजत दी है। अदालत ने कहा कि पिछले आदेश पर विचार करते हुए संस्था को 15000 वर्ग मीटर क्षेत्र में क्रिसमस संगीत समारोह आयोजित करने की इजाजत दी जाती है। न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति एम. एम. साठे की पीठ के समक्ष प्रभु येशु जन्मोत्सव संस्था की ओर से वकील जतीन शेठ और अंकुश शाह की दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील नवरोज सीरवाई पीठ ने दलील दी कि याचिकाकर्ता हर साल एक क्रिसमस म्यूजिकल फेस्टिवल का आयोजन करता रहा है। यह फेस्टिवल सिर्फ एक दिन के लिए है। इस साल 14 दिसंबर को होना तय किया गया है। इस पर पीठ ने कहा कि पिछले आदेश पर विचार करते हुए याचिकाकर्ता को 15000 वर्ग मीटर क्षेत्र में क्रिसमस म्यूजिकल फेस्टिवल करने की परमिशन दी जाती है। पीठ ने कहा कि ऐसे इवेंट को करने की इजाजत देते समय अधिकारियों द्वारा लगाई गई सभी शर्तों का याचिकाकर्ता को पूरी तरह से पालन करना होगा। यह भी साफ किया जाता है कि बीएमसी, कलेक्टर के प्रतिनिधि और संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रतिनिधि इवेंट की तारीख पर साइट पर जा सकते हैं और फोटो ले सकते हैं। याचिकाकर्ता को इस ऑर्डर की वजह से प्रभावित पार्टी को हर्जाना देगा। पीठ ने फेस्टिवल की इजाजत देते हुए संस्था पर कुछ शर्ते भी लगाई है, जिसमें उसे यह सुनिश्चित करने होगा कि संस्था कोई भी व्यावसायिक विज्ञापन को नहीं हटाएगी। संस्था लोकल अथॉरिटी (इलेक्ट्रिक इंस्पेक्शन डिपार्टमेंट और फायर डिपार्टमेंट) से इजाजत लेगी और अलग-अलग पर्यावरण के नियमों का पालन करेगी।

विलेपार्ले सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी वरिष्ठ सदस्यों से ऑफिसर के 49 लाख की रिकवरी आदेश किया रद्द

उधर बॉम्बे हाई कोर्ट ने विले पार्ले (प.)में अमित दर्शन को ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी के कामकाज और अकाउंट्स की जांच से जुड़े एक मामले में अपने अहम फैसला कहा कि महाराष्ट्र को ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के सेक्शन 88 के तहत किसी ऑफिसर द्वारा जमा की गई रिपोर्ट गैर-कानूनी है, अगर वह ऑफिसर को बदलने के बाद रिपोर्ट फाइल की जाती है। अदालत ने सोसायटी के खिलाफ ऑफिसर को बदलने के बाद फाइल की गई सेक्शन 88 के तहत पेश रिपोर्ट और 49 लाख 45 हजार रुपए का रिकवरी ऑर्डर रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल पीठ ने सोसायटी के 8 वरिष्ठ नागरिकों की याचिका को स्वीकार करते हुए ने कहा कि एक बार जब किसी ऑफिसर को बदल दिया जाता है, तो उसके पास जांच जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है। अक्टूबर 2018 में डिप्टी रजिस्ट्रार ने खुद से सेक्शन 83 के तहत अमित दर्शन की जांच शुरू की, जो अधिकारियों को कोऑपरेटिव सोसाइटी के कामकाज और अकाउंट्स की जांच करने की इजाजत देता है। यह रिपोर्ट सिर्फ एक राय है और इसमें जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। इस जांच के बाद अक्टूबर 2019 में सेक्शन 88 के तहत एक अधिकारी नियुक्त किया गया। सेक्शन 88 का इस्तेमाल यह तय करने के लिए किया जाता है कि सोसाइटी को हुए फाइनेंशियल नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है और हर व्यक्ति को कितना चुकाना होगा। नियुक्त अधिकारी ने आरोप तय किए और जवाब भी लिए, लेकिन रिपोर्ट पूरी करने में देरी की। देरी की वजह से रजिस्ट्रार ने 14 फरवरी 2022 को उन्हें बदल दिया। अपना अधिकार खोने के बावजूद अधिकारी ने 28 फरवरी को एक रिपोर्ट तैयार की और 1 मार्च 2022 को जमा कर दी। इस रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों ने अक्टूबर 2022 में सेक्शन 98 के तहत 49 लाख 45 हजार रुपए का रिकवरी का आदेश जारी किया, जो सेक्शन 88 के तहत तय रकम की रिकवरी की इजाजत देने वाला प्रोविजन है। सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी के वरिष्ठ नागरिकों ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती और याचिका में दावा किया कि ऑफिसर ने जरूरी डॉक्यूमेंट्स की जांच नहीं की। तीन याचिकाकर्ता उस समय मैनेजिंग कमिटी के सदस्य नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें एक्ट के तहत बिना किसी आधार के कथित नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। पीठ ने माना कि रिपोर्ट अमान्य थी, क्योंकि अधिकारी के पास एक बार बदले जाने के बाद कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं था। इसलिए रिपोर्ट अमान्य थी और रिकवरी सर्टिफिकेट और उस पर आधारित बाद के अपील और रिवीजन ऑर्डर भी टिक नहीं सकते थे।

Created On :   30 Nov 2025 10:01 PM IST

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