कंज्यूमर कोर्ट: हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को विदेश में कैंसर के इलाज के लिए मेडिकल पॉलिसी होल्डर को 66 लाख देने का निर्देश

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को विदेश में कैंसर के इलाज के लिए मेडिकल पॉलिसी होल्डर को 66 लाख देने का निर्देश
  • बीमा कंपनी ने गलत तरीके से मेडिकल पॉलिसी होल्डर को कैंसर का विदेश में ट्रीटमेंट के लिए क्लेम को कर दिया था रिजेक्ट
  • बीमा धारक ने निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का लिया था फैमिली फर्स्ट प्लैटिनम पॉलिसी

Mumbai News. हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां ग्रांहकों को बड़े-बड़े वादे कर मेडिकल हेल्थ इंश्योरेंस देती हैं, लेकिन जब वे (बीमा धारक) इलाज के लिए पैसे का क्लेम करते हैं, तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां पैसे देने से बचने के लिए कोई न कोई बहाने बना कर क्लेम के पैसे देने से इनकार कर देती है। ऐसा ही एक मामला मुंबई के जुहू निवासी आलोक राजेंद्र बेक्टर का आया है, जिसे निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने गलत तरीका से विदेश में कैंसर के इलाज के लिए गलत तरीके से क्लेम का पैसा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने ने कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो कोर्ट हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को कैंसर के इलाज के लिए उन्हें 66 लाख 50 हजार रुपए देने का निर्देश दिया है।

मेडिकल पॉलिसी होल्डर (बीमा धारक) की ओर से पेश वकील रोहित लालवानी और सजल खान ने कंज्यूमर कोर्ट में दलील दी कि कमीशन का आदेश लगातार पॉलिसी लागू करने के महत्व पर जोर देता है। एक बार पॉलिसी रद्द करने को गलत घोषित कर दिया जाता है, तो बीमा कंपनी कवरेज से इनकार करने के लिए प्रोसेस में आने वाली कमियों पर भरोसा नहीं कर सकती है। हालांकि बीमा कंपनियों को पॉलिसी की शर्तों को लागू करने का अधिकार है, लेकिन ऐसी शर्तों को इस तरह से लागू नहीं किया जा सकता, जो मेडिकल पॉलिसी होल्डर के साथ गलत हो और साफ तौर पर क्लेम को पूरा करने से बचने के लिए सिर्फ एक टेक्निकल बात के तौर पर इसका ज़िक्र किया जा रहा है। यह इंडस्ट्री और कंज्यूमर्स दोनों के लिए एक जरूरी सफाई है। पॉलिसीहोल्डर आलोक राजेंद्र बेक्टर ने दुनिया भर में कवरेज के साथ ‘हार्टबीट फैमिली फर्स्ट प्लैटिनम पॉलिसी’ खरीदी थी। वह यूनाइटेड स्टेट्स में कोलोरेक्टल कैंसर का इलाज करवा रहे थे। पॉलिसी की शर्तें पूरी करने और विदेश यात्रा से पहले बीमाधारक को बताने के बावजूद विदेश में इलाज के लिए उसका क्लेम रिजेक्ट कर दिया गया।

कंज्यूमर कोर्ट ने पाया कि बीमा कंपनी ने अपनी पिछली पॉलिसी कैंसल कर दी थी, जिसे बाद में 2020 में ओम्बड्समैन के फैसले के बाद बहाल कर दिया गया था। इसका असर यह हुआ कि पॉलिसी होल्डर को पॉलिसी की शर्तों के तहत आम तौर पर जरूरी कैशलेस सुविधा का फायदा नहीं मिल पाया। नीवा बूपा ने शिकायत करने वाले की पहली पॉलिसी को गलत तरीके से कैंसल कर दिया, इस झूठे आधार पर कि उसे अस्थमा के बारे में नहीं बताया गया था, जो एक ऐसी बीमारी है, जिसका कैंसर के डायग्नोसिस से कोई लेना-देना नहीं है। इंश्योरेंस ओम्बड्समैन ने 2020 में ही फ़ैसला सुनाया था कि पॉलिसी कैंसल करना गलत था और अस्थमा के बारे में बताने का कैंसर के खतरे या विदेश में इलाज से कोई लेना-देना नहीं था।

Created On :   30 Nov 2025 9:25 PM IST

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