बॉम्बे हाई कोर्ट: चरित्र संदेह पर पत्नी की हत्या करने वाले दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा से बरी करने से इनकार

चरित्र संदेह पर पत्नी की हत्या करने वाले दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा से बरी करने से इनकार
  • पत्नी के चरित्र पर संदेह होने पर हत्या का मामला
  • पत्नी के चरित्र पर संदेह होने पर हत्या के मामले में दोषी है व्यक्ति
  • आजीवन कारावास की सजा से बरी करने से इनकार कर दिया

Mumbai News. बॉम्बे हाई कोर्ट ने पत्नी के चरित्र पर संदेह होने पर हत्या के मामले में दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा से बरी करने से इनकार कर दिया अदालत ने कहा कि व्यक्ति का आचरण स्वाभाविक नहीं था। वह घटना के समय घटना स्थल (घर पर) मौजूद था, लेकिन उसने पत्नी को बचाने का प्रयास नहीं किया। इसको लेकर उसका स्पष्टीकरण विश्वसनीय नहीं था। चिकित्सकीय एवं अन्य साक्ष्य अभियोजन के मामले का समर्थन करते हैं। न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने शमशेर अबुलेश देवांग की याचिका पर खारिज करते हुए कहा कि यद्यपि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है, लेकिन सभी परिस्थितियाँ मिलकर एक पूर्ण और अखंड श्रृंखला बनाती हैं जो आरोपी के अपराध को सिद्ध करती है। याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी साथ रहते थे। पत्नी की मृत्यु आग से हुई। अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला सफलतापूर्वक सिद्ध कर दी है और आरोपी के विरुद्ध हत्या का अपराध संदेह से परे प्रमाणित होता है। इसलिए याचिकाकर्ता को आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी गई।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। किसी प्रत्यक्षदर्शी ने हत्या होते नहीं देखी। अभियोजन हत्या का उद्देश्य और घटनाओं की पूरी श्रृंखला संदेह से परे सिद्ध नहीं कर पाया और उसे झूठा फंसाया गया है। अभियोजन के अनुसार आरोपी अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था। 12 जून 2018 को उसने पत्नी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने मौके का पंचनामा, पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयान दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया।

क्या है पूरा मामला

शमशेर अबुलेश देवांग (आरोपी) द्वारा याचिका दायर की गई थी। नासिक सेशन कोर्ट ने देवांग को अपनी पत्नी आयशा खातून की हत्या (आईपीसी की धारा 302) का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। देवांग ने इस सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

Created On :   19 July 2026 8:58 PM IST

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