विशेष व्याख्यान: हिन्दी में रोजगार की अपार संभावनाएं, इसके उपयोग पर गंभीरता से विचार जरूरी - प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित

हिन्दी में रोजगार की अपार संभावनाएं, इसके उपयोग पर गंभीरता से विचार जरूरी - प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित
  • पत्रकारिता, विज्ञापन और व्यापार में बढ़ रही भाषा विशेषज्ञों की मांग
  • हिन्दी की सरलता और सहजता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत
  • आधुनिक तकनीक के साथ हिन्दी का लगातार हो रहा विकास

डिजिटल डेस्क, नागपुर। हिन्दी दुनिया की प्रमुख भाषाओं में से एक है। यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है। हिन्दी में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं और देश-दुनिया का बड़ा बाजार इससे जुड़ा हुआ है। आज प्रतिस्पर्धा के दौर में हिन्दी को आगे बढ़ाने के लिए इसके उपयोग और महत्व पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। यह बात हिन्दी के विद्वान और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के सभापति प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कही। वे राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की ओर से आयोजित विशेष व्याख्यान में बोल रहे थे।

हिन्दी में रोजगार के अवसरों पर चर्चा करते हुए प्रो. दीक्षित ने कहा कि हिन्दी की सरलता और रचनात्मकता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह आसानी से समझ में आती है और अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने में मदद करती है। इसी कारण हिन्दी संपर्क भाषा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, व्यापार, संवाद और विज्ञापन जैसे क्षेत्रों में हिन्दी जानने वाले विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहती है। इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। आधुनिक तकनीक के साथ जुड़कर हिन्दी ने अपनी क्षमता भी साबित की है।


कार्यक्रम की शुरुआत में हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे ने कहा कि रोजमर्रा के जीवन में हिन्दी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। लोग इसे आसानी से अपनाते हैं और इसका महत्व भी बढ़ रहा है।

इस अवसर पर बाबा साहब आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. बलजीत श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन प्रा. जागृति सिंह ने किया, जबकि आभार डॉ. लखेश चंद्रवंशी ने माना।

Created On :   4 Oct 2026 6:50 PM IST

Tags

Next Story