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Nagpur News: अस्थमा से डरने की नहीं, नियंत्रित करने की जरूरत, समय रहते उपचार मिले

Nagpur News अस्थमा तेजी से उभरती गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। इस बीमारी को नियंत्रित करने व जागरूकता के लिए मई के पहले मंगलवार को ‘विश्व अस्थमा दिवस’ मनाया जाता है। मेडिकल के श्वसन रोग विभाग में हर महीने औसत 400 मरीज अस्थमा की जांच व उपचार के लिए आते हैं। इनमें 30 प्रतिशत बच्चे व किशोर शामिल होते हैं। डॉक्टर के अनुसार मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। ऐसे में उनका उपचार और जटिल हो जाता है।
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हवा में प्रदूषण : नागपुर में अस्थमा के मामले बढ़ने के पीछे हवा में प्रदूषण सबसे बड़ा कारण बताया गया है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, वाहनों का धुआं, परागकण और मौसम में अचानक बदलाव, एलर्जी, इनडोर लाइफ स्टाइल और कम शारीरिक गतिविधि इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं। लगातार खांसी, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज और सांस फूलना इसके प्रमुख लक्षण हैं। जिन्हें अक्सर सामान्य सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। डंपिंग यार्ड और बड़े कंस्ट्रक्शन साइड के आसपास रहने वाले लोगों में सांस संबंधी समस्याएं अधिक पाई जा रही हैं। बच्चों में अस्थमा के बढ़ते मामले उनके भविष्य के लिए खतरा है।
उपचार और सही प्रबंधन की कमी : भारत में हर साल करीब 1.9 लाख लोगों की मौत अस्थमा के कारण होती है। समय पर इलाज और सही प्रबंधन की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में नागपुर में अस्थमा एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर सकता है। सबसे बड़ी समस्या इनहेलर को लेकर फैली गलतफहमी है। करीब 60 प्रतिशत मरीज इनहेलर लेने से बचते हैं। मरीज इसे आदत लगाने वाली दवा मानते हैं। यह सबसे सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार है। लगभग 60% रोगी इनहेल्ड कॉर्टिकोस्टेरॉयड्स जैसी प्रमुख जीवनरक्षक दवाओं का उपयोग गलत तरीके से करते हैं। यह भी चिंता का विषय है। इस कारण बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है।
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डरने की नहीं, समझने की जरूरत : अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से दवाएं लेनी चाहिए। इनहेलर का उपयोग करना चाहिए। धूल और धुएं से बचना चाहिए। मास्क का उपयोग करें, घर में साफ-सफाई और वेंटिलेशन बनाए रखें तथा समय-समय पर फेफड़ों की जांच कराएं। यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया और मरीजों ने इलाज में लापरवाही की, तो आने वाले समय में अस्थमा एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बनेगा। अस्थमा से डरने की नहीं, बल्कि उसे समझकर नियंत्रित करने की जरूरत है। -डॉ. सुशांत मेश्राम, श्वसन रोग विभाग प्रमुख मेडिकल
Created On :   5 May 2026 1:51 PM IST













