Nagpur News: नागपुर के प्रादेशिक जंगलों में बाघों की गणना शुरू , 700 कैमरों से निगरानी

नागपुर के प्रादेशिक जंगलों में बाघों की गणना शुरू , 700 कैमरों से निगरानी
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

Nagpur News नागपुर के प्रादेशिक जंगलों में बाघों की गणना शुरू हो गई है। कुल 7 सौ कैमरों से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अब तक देवलापार, पवनी, खापा, बोर, उमरेड करहंडला आदि में बाघों की गणना को पूरा किया गया है। अब काटोल, कोंढाली, कलमेश्वर क्षेत्र में कैमरे लगाए जाने वाले हैं। इस अभियान के तहत विभाग के अंतर्गत आने वाले कुल 14 रेंजों में गणना की जाएगी। इन कैमरों के माध्यम से बाघों की तस्वीरें और वीडियो कैद किए जाएंगे, जिनके आधार पर बाघों की सटीक संख्या का आकलन किया जाएगा। प्राप्त आंकड़ों को वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआई), देहरादून को सौंपा जाएगा, जो देशव्यापी अखिल भारतीय व्याघ्र प्रगणना के लिए इनका उपयोग करेगा।

सही संख्या की मिलेगी जानकारी ः कैमरे मुख्य रूप से उन स्थानों पर लगाए जाएंगे, जहां बाघों के आने-जाने की संभावना अधिक होती है-जैसे पानी के स्रोत, नदी-नालों के किनारे, मुख्य पगडंडियां और प्राकृतिक गलियारे। यह अभियान न केवल नागपुर क्षेत्र के बाघों की सही संख्या बताएगा, बल्कि उनके क्षेत्रीय वितरण, गतिविधि पैटर्न और स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा। डब्ल्यूआई इन सभी स्थानीय आंकड़ों को इकट्ठा कर राष्ट्रीय स्तर पर विश्लेषण करेगा और बाघ संरक्षण की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेगा।

तीसरे व चौथे फेज का काम जारी : पहला व दूसरा फेज पूरा कर लिया है। अब तीसरे व चौथे फेज में कैमरा ट्रैपिंग से बाघों की गणना की जा रही है। इसके लिए 7 सौ कैमरों की मदद ली गई है। - विनिता व्यास, डीएफओ, (प्रादेशिक) वन विभाग नागपुर

दो फेज पूरा ः वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाघ गणना की यह प्रक्रिया व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से संचालित की जा रही है। इससे पहले लाइन ट्रांजिट सर्वे और साइन सर्वे (पगमार्क, मल, मूत्र आदि के निशान) का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अब कैमरा ट्रैपिंग अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण चल रहा है, जिसे तीसरा, चौथा फेज भी कहा जाता है। इस संबंध में विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित करने के लिए 9 फरवरी को एक विशेष कार्यशाला का आयोजन भी किया गया था। कार्यशाला में कैमरा स्थापना, रख-रखाव, डेटा संग्रह और सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

यहां बाघों की अच्छी आबादी : नागपुर वन प्रादेशिक के अंतर्गत आने वाली 14 रेंजों में देवडी, पवनी, खापा, रामटेक, पारशिवनी, नरखेड़, काटोल, कोंढाली, कलमेश्वर, हिंगना, बुटीबोरी, नॉर्थ उमरेड, साउथ उमरेड और नागपुर रेंज शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में बाघों की उपस्थिति की पुष्टि विभिन्न सर्वेक्षणों में हो चुकी है। खासकर उमरेड-करहंडला वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के जंगलों में बाघों की अच्छी आबादी देखी गई है। कैमरा ट्रैपिंग को बाघ गणना का सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है। प्रत्येक बाघ की पहचान उसके शरीर पर मौजूद अनोखी धारियों के पैटर्न से की जाती है, जिससे एक ही बाघ की दोहरी गिनती की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।


Created On :   6 May 2026 11:15 AM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story