Nagpur News: बड़ी उपलब्धि , जांच और दवाइयां होंगी 6 गुना तक सस्ती

बड़ी उपलब्धि , जांच और दवाइयां होंगी 6 गुना तक सस्ती
नागपुर यूनिवर्सिटी का शोध,अनाज से तैयार होगा लैब कल्चर, विदेशी मानकों पर निर्भरता घटेगी

Nagpur News राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विद्यापीठ के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिससे भविष्य में बीमारियों की जांच और दवाइयों का खर्च भारी मात्रा में कम होने की संभावना है। विद्यापीठ के "मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड जेनेटिक इंजीनियरिंग' विभाग ने प्राकृतिक एवं शाकाहारी पदार्थों (भारतीय अनाज) के माध्यम से सूक्ष्मजीवों के संवर्धन का एक नया तरीका खोज निकाला है। इस तकनीक से प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाला "संवर्धन माध्यम' (कल्चर मीडिया) अब अनाज से तैयार किया जा सकेगा।

आम जनता को क्या होगा फायदा? : वर्तमान में अस्पतालों और लैब में बैक्टीरिया या अन्य सूक्ष्मजीवों को बढ़ाने (संवर्धन) के लिए जो "मीडिया' इस्तेमाल होता है, वह बहुत महंगा होता है। इस वजह से मेडिकल टेस्ट और दवाइयों की कीमतें बढ़ जाती हैं। नागपुर के शोधकर्ता ने नया "ए प्लांट बेस्ट कल्चर मीडिया फार्म्युलेशन फाॅर कल्टीव्हेटींग मायक्रोऑर्गानिझम्स' खोजा है। यह विकल्प इतना सस्ता है कि इससे पैथोलॉजिकल जांचों का खर्च और सूक्ष्मजीवों से बनने वाली जीवनरक्षक दवाओं की कीमतें 5 से 6 गुना तक कम होने की संभावना है।

इन शोधकर्ताओं की उपलब्धि : यह शोध कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के मार्गदर्शन और विभाग प्रमुख डॉ. दयानंद गोगले के नेतृत्व में पूरा हुआ। इस टीम में डॉ. माधुरी ठाकरे, यजुर्वेद सेलोकर, तनेश्वरी हिरापुरे, डॉ. रीना मेश्राम, डॉ. राखी शंभरकर और डॉ. ललिता सावरकर शामिल हैं।

विदेशी कंपनियों का एकाधिकार खत्म होगा : पिछले 100 सालों से दुनिया भर की लैब दो मुख्य विदेशी मानकों (न्यूट्रिएंट अगर और एलबी मीडिया) पर निर्भर थीं। ये तकनीकें महंगी हैं और इनके लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। नागपुर विद्यापीठ के शोधकर्ताओं ने भारतीय अनाज का उपयोग कर एक "स्वदेशी' विकल्प तैयार किया है। इसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से मान्यता भी मिल गई है।

शोध की प्रमुख विशेषताएं :

स्वदेशी आत्मनिर्भरता : अब लैब के सामान के लिए विदेशी निर्भरता कम होगी।

समान अवसर : कम खर्च होने के कारण अब छोटे शहरों के कॉलेजों और छात्रों को भी बेहतर प्रयोग करने का मौका मिलेगा।

5आसान और सुरक्षित : यह पूरी तरह प्राकृतिक है और इसे कहीं भी आसानी से तैयार किया जा सकता है।


Created On :   22 April 2026 11:35 AM IST

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