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नागपुर खंडपीठ: हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच, राज्य सरकार ने अदालत में प्रस्तुत की रिपोर्ट

Nagpur News. बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में दायर एक जनहित याचिका में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर (एनसीएल) प्रमाण-पत्रों की सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथपत्र के माध्यम से अदालत को अवगत कराया कि हाईकोर्ट के 23 फरवरी के आदेश के बाद नागपुर जिले में जारी किए गए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच की गई है और उसकी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की गई है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नागपुर के जिलाधिकारी इन प्रमाणपत्रों के जारी करने पर सतत निगरानी रख रहे हैं और भविष्य में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। एड. सुंदीप बदाना ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ईडब्ल्यूएस/एनसीएल प्रमाण-पत्र बिना किसी ठोस जांच-पड़ताल के जारी किए जा रहे हैं, जिससे अयोग्य लोग आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। विशेष रूप से मेडिकल कॉलेजों में भारी फीस वाली मैनेजमेंट और एनआरआई कोटा सीटों पर ईडब्ल्यूएस/एनसीएल का दावा कर दाखिले लेने के मामले सामने आए हैं।
कोर्ट की नाराजगी
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों को रोकने के लिए प्रभावी उपायों के अभाव पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि जिलाधिकारी द्वारा केवल दिशा निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं, इसकी रैंडम जांच करना आवश्यक है। इसलिए न्यायालय ने राज्य सरकार को इन निर्देशों के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। मामले पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथपत्र दायर करते हुए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच करने की जानकारी दी गई। याचिकाकर्ता एड. सुंदीप बदाना खुद पक्ष रखा, राज्य सरकार की ओर से एड. संगीता जाचक ने पैरवी की।
उपजिलाधिकारियों की नियुक्ति : राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र के अनुसार, नागपुर जिले में जारी किए गए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र नियमों के अनुरूप हैं या नहीं, इसकी जांच के लिए निवासी उपजिलाधिकारी ने 13 अप्रैल 2026 को तीन उपजिलाधिकारियों की नियुक्ति की। इसके बाद, संबंधित उपजिलाधिकारियों द्वारा लगभग 26 प्रमाणपत्रों की रैंडम जांच कर उसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई।
Created On :   18 April 2026 7:35 PM IST












