Nagpur News: सूखे से किसान बेहाल, सरकार तत्काल आर्थिक मदद दें , मराठा-ओबीसी आरक्षण पर वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा

सूखे से किसान बेहाल, सरकार तत्काल आर्थिक मदद दें , मराठा-ओबीसी आरक्षण पर वडेट्टीवार ने सरकार को घेरा
  • 83 तहसीलें सूखे की चपेट में, कई इलाकों में 35 से 40 दिन से बारिश का इंतजार
  • तत्काल फसलों के पंचनामे कराकर आर्थिक सहायता घोषित करने की कांग्रेस नेता की मांग
  • एमपीएससी मामले में तत्कालीन अध्यक्ष की भूमिका की जांच की मांग

Nagpur News महाराष्ट्र के कई जिलों में बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार से किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राज्य के 19 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं और 83 तहसीलें सूखे की चपेट में हैं। कई क्षेत्रों में 35 से 40 दिनों से बारिश नहीं हुई है। ऐसे में खरीफ की फसलें बर्बादी की कगार पर हैं और किसान गंभीर संकट में है।

35-40 दिन से बारिश नहीं, तत्काल पंचनामे की मांग : वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार को फिलहाल शक्तिपीठ समेत अन्य मुद्दों को किनारे रखकर किसानों की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। सरकार तत्काल फसलों के पंचनामे कराए और यह स्पष्ट करे कि फसल बीमा के तहत किसानों को कितनी सहायता मिलेगी और सरकार अपनी ओर से कितनी आर्थिक मदद देगी। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की घोषणाएं कर रही है, वहीं दूसरी ओर किसान संकट में है। मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। किसानों के मुद्दे पर वे जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात करेंगे।

मराठा-ओबीसी को सरकार उलझा रही : वडेट्टीवार ने मराठा और ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोनों समाजों को उलझाए रखने का काम कर रही है और आरक्षण को लेकर उसकी भूमिका फसाने वाली है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का समाधान संविधान के दायरे में होना चाहिए। आंदोलन के दबाव में आरक्षण पर फैसला नहीं लिया जा सकता। सरकार को यह गारंटी देनी चाहिए कि एक समाज को न्याय देते समय दूसरे समाज के आरक्षण और अधिकार प्रभावित नहीं होंगे। वडेट्टीवार ने सवाल किया कि सरकार ने ओबीसी समाज के लिए अब तक क्या किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जरांगे पाटील के आंदोलन के दबाव में सरकार झुक गई है।

एमपीएससी मामले में तत्कालीन अध्यक्ष की भूमिका की जांच हो : एमपीएससी पेपरलीक और परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी वडेट्टीवार ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. अभय वाघ पर लगे आरोपों की जांच की मांग की।

उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में वाघ की भूमिका क्या थी? क्या सरकार उनकी भी जांच करेगी या उन्हें संरक्षण देगी? उन्होंने 2002 के एमपीएसी पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन अध्यक्ष शशिकांत कर्णिक पर कार्रवाई की गई थी। वडेट्टीवार ने ओबीसी और आदिवासी समाज के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिंदुनामावली में बदलाव से आदिवासियों के अवसर प्रभावित हुए हैं। आदिवासियों के अवसर कम किए गए तो कांग्रेस इसका मजबूती से विरोध करेगी। यह मुद्दा भी राज्यपाल के सामने उठाया जाएगा।


Created On :   9 Sept 2026 3:35 PM IST

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