ईडी की कार्रवाई: बिल्डर पांडे के ठिकानों पर छापा, 1 करोड़ 95 हजार रुपए नकदी जब्त, 40 लाख के बैंक खाते फ्रीज

बिल्डर पांडे के ठिकानों पर छापा, 1 करोड़ 95 हजार रुपए नकदी जब्त, 40 लाख के बैंक खाते फ्रीज
  • बैंक में गिरवी रखे फ्लैट्स को बिना एनओसी के बेचा
  • दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की गई थी

डिजिटल डेस्क, नागपुर. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मेसर्स प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स के प्रोप्राइटर शशांक गोविंद प्रसाद पांडे से जुड़े नागपुर के दो ठिकानों पर शनिवार को छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने 1.95 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नकदी और कई आपत्तिजनक दस्तावेज व डिजिटल उपकरण जब्त किए। साथ ही 40 लाख रुपए से अधिक का बैंक बैलेंस भी फ्रीज कर दिया गया है। जांच एजेंसी को करोड़ों रुपए की कई अचल संपत्तियों का भी पता चला है, जिनके अपराध की कमाई से खरीदे जाने का संदेह है।

ईडी की यह जांच नागपुर शहर के अजनी पुलिस थाने और राणाप्रतापनगर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 418 और 420 के तहत दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में सामने आया है कि शशांक गोविंद प्रसाद पांडे कई धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल था, जिससे निर्दोष लोगों को भारी नुकसान हुआ। एक मामले में उसने एक बुजुर्ग विधवा महिला की जमीन को लेकर एक डेवलपमेंट एग्रीमेंट किया था, जिसके तहत उसे 1.75 करोड़ रुपए और 14 आवासीय फ्लैट शिकायतकर्ता को देने थे। डिक्लेरेशन-कम-करेक्शन डीड के जरिए ये फ्लैट महिला के नाम चिह्नित किए गए थे। हालांकि, आरोपी ने महिला की जानकारी या सहमति के बिना इस डीड को धोखाधड़ी से रद्द कर दिया और फ्लैट्स को किसी तीसरे पक्ष को बेच दिया। फ्लैट्स की बिक्री से मिले 8.93 करोड़ रुपए उसने अपने निजी फायदे के लिए हड़प लिए। इसके अलावा, डेवलपमेंट एग्रीमेंट के तहत देय 45 लाख भी रोक लिए, जिससे शिकायतकर्ता को 9.4 करोड़ का नुकसान हुआ।

बैंक में गिरवी रखे फ्लैट्स को बिना एनओसी के बेचा : एक अन्य मामले में, "दिव्या प्रयाग अपार्टमेंट' प्रोजेक्ट की जांच में पाया गया कि 22 करोड़ के प्रोजेक्ट लोन (जिसमें से 11 करोड़ जारी किए गए थे) के एवज में 22 फ्लैट्स दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पास गिरवी रखे गए थे। आरोपी पांडे ने बैंक से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना और खरीदारों से गिरवी होने की बात छुपाकर इन फ्लैट्स को बेच दिया। उसने होम लोन के संबंध में बैंक में एक झूठा हलफनामा भी जमा किया, जिसमें मौजूदा गिरवी की जानकारी छिपाई गई थी। बाद में 12.84 करोड़ रुपए का बकाया दर्ज किया गया और सरफेसी कानून के तहत कार्रवाई शुरू की गई।

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