महत्वपूर्ण: उपराजधानी के वैज्ञानिक की बड़ी खोज, पतंगे की नई प्रजाति मिली - दिया टॉस्पिटिस इंडिका नाम

उपराजधानी के वैज्ञानिक की बड़ी खोज, पतंगे की नई प्रजाति मिली - दिया टॉस्पिटिस इंडिका नाम
  • नागपुर विश्वविद्यालय परिसर में मिले थे पतंगे के 2 नमूने, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
  • ‘टॉस्पिटिस इंडिका’ नाम दिया, भारत और दक्षिण एशिया में पहली बार दर्ज हुई मौजूदगी

डिजिटल डेस्क, नागपुर. उपराजधानी के लिए गर्व की बात है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (आरटीएमएनयू) के प्राणीशास्त्र विभाग के शोधकर्ता राहुल बबनराव भेंडे ने पतंगे की एक नई प्रजाति की खोज की है। इस नई प्रजाति का नाम ‘टॉस्पिटिस इंडिका’ रखा गया है। यह प्रजाति भारत और पूरे दक्षिण एशिया में पहली बार दर्ज की गई है। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ‘टॉस्पिटिस’ वंश की भारत और दक्षिण एशिया में यह पहली आधिकारिक दर्ज उपस्थिति है। इससे पहले इस वंश के पतंगे की भारत में मौजूदगी का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

इजराइल के अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध

इस शोध के निष्कर्ष ‘इजराइल जर्नल ऑफ एंटोमोलॉजी’ के खंड 55 में प्रकाशित हुए हैं। यह एक अंतरराष्ट्रीय कीटविज्ञान जर्नल है। ‘टॉस्पिटिस’ वंश का वर्णन सबसे पहले 1863 में वॉकर ने किया था, लेकिन भारत में इसकी मौजूदगी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। नई प्रजाति के नाम में ‘इंडिका’ शब्द भारत के नाम पर रखा गया है।

विश्वविद्यालय परिसर में मिले थे 2 नमूने

राहुल भेंडे ने बताया कि उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय परिसर से वयस्क पतंगों के 2 नमूने एकत्र किए थे। इन्हीं नमूनों के आधार पर नई प्रजाति का वैज्ञानिक वर्णन किया गया। शोध में पतंगे की बाहरी बनावट के साथ उसके जननांगों की सूक्ष्म संरचना की तस्वीरें भी शामिल की गई हैं। इन विशेषताओं के आधार पर इस प्रजाति को दूसरी प्रजातियों से अलग पहचाना जा सकता है। इसके अलावा, शोध में दुनिया भर में इस वंश की प्रजातियों की अद्यतन सूची भी दी गई है।

वातावरण अलग, इसलिए खोज महत्वपूर्ण

अध्ययन के अनुसार, इस वंश के पतंगे इससे पहले दक्षिण-पूर्व एशिया के नम जंगलों में पाए जाते थे, जबकि नागपुर का क्षेत्र दक्कन के पठार के शुष्क पर्णपाती वनों के अंतर्गत आता है। ऐसे में इस प्रजाति की यहां मौजूदगी से संकेत मिलता है कि ‘टॉस्पिटिस’ वंश के पतंगे पहले की अपेक्षा अधिक विविध प्रकार के वातावरण में भी रह सकते हैं।

शोधकर्ता के लिए चुनौतीपूर्ण था काम

इस खोज के बारे में राहुल भेंडे ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद एकल लेखक के रूप में इस शोध को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने इस दौरान सहयोग के लिए स्लोवाकिया के डॉ. बुचेक का आभार माना। गौरतलब है कि अगस्त 2026 में भी राहुल भेंडे ने ‘स्ट्यूनिंगेरिया नागपुरेंसिस’ नामक पतंगे की एक अन्य नई प्रजाति की खोज की थी। ये खोजें दर्शाती हैं कि नागपुर और मध्य भारत में जैव विविधता के ऐसे कई पहलू अब भी मौजूद हैं, जिनके बारे में वैज्ञानिक जानकारी सीमित है।

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