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लगा 14 किलोमीटर लंबा जाम - दस घंटे बद रहा पन्ना छतरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग

September 23rd, 2019 13:53 IST
लगा 14 किलोमीटर लंबा जाम - दस घंटे बद रहा पन्ना छतरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग

डिजिटल डेस्क पन्ना। पन्ना छतरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मड़ला के बाद से पन्ना तक मार्ग के संकीर्ण होने के चलते मार्ग में ट्रक अथवा अन्य बड़े वाहनो के दुर्घटना ग्रस्त हो जाने, खराब हो जाने के चलते मड़ला घाटी और इसके पहले कई बार जाम की स्थितियां निर्मित हो जाती है। स्मृति वन के आगे से लेकर मड़ला तक रास्ते में संघन जंगल को छोड़ कर गांव नही है इसके चलते जब जाम लगता है तो यात्रियों की मुसीबते कई गुनी बढ़ जाती है। बड़े वाहन जब सड़क में पलट जाते है तो रास्ता क्लीयर करने को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासन के पास व्यवस्थाएं नही होने के चलते जाम की अवधि लंबी खीच जाती है। पिछली रात्रि को पन्ना छतरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित स्मृति वन में दो ट्रको की टक्कर हो जाने से ट्रको की कमानी टूट जाने से दोनो ट्रक पूरी सड़क में रूक गये। ट्रको के सड़क में खराब हो जाने के चलते पन्ना छतरपुर में चार पहिया वाहनो की आवाजाही दोनो ओर से अवरूद्ध हो गयी रात के वक्त बेस्ट राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनो ओर धीरे-धीरे यात्री बसो सहित ट्रको एवं ट्रालो के पहिये एक के बाद एक थमने लगे और करीब साढ़े बारह बजे तक स्थिति यह हुई कि दोनो ओर लंबा जाम लग गया। ट्रक चालक रात्रि में त्वरित रूप से कमानी पट्टे लगाये जाने की व्यवस्था नही कर पाया जिसके चलते रात्रि में बारह बजे से लेकर सुबहआठ बजे के दौरान करीब 14 किमी से अधिक लंबा जाम पहुंच गया। सिर्फ दो पहिया वाहन भी मुश्किल से निकल पा रहे थे। 
यात्री हुए परेशान
सुबह तक जाम लगे हुये 8 घंटे से भी अधिक का समय व्यतीत हो चुका था और ट्रको के टूटे कमानी पट्टो को लगाये जाने को लेकर मिस्त्रियो को बुलवाने के बाद काम प्रारंभ किया गया रात्रि में जाम लग जाने के चलते मुसाफिरो को भारी असुविधाओ का सामना करना पड़ा। बसों में फसे यात्री परेशान रहे सबसे ज्त्यादा मुश्किल छोटे बच्चों, महिलाओं तथा बुजुर्गों की रही। जो 8 घंटे की अवधि के दौरान भूखे प्यासे रहने के लिये मजबूर दिखे कुछ यात्री जरूर इस दौरान स्मृति वन तक पहुंचे और टैक्सी में बैठ कर पन्ना आये।  स्मृति वन से लेकर मड़ला तक सड़क के दोनो ओर नेशनल पार्क का जंगल है जहां जरूरत की कोई भी चीज मिल पाना मुमकिन नही है। जिसके चलते जाम लगने की वजह से हजारो यात्रियो के आठ से दस घंटे मुश्किल से गुजरे। सुबह करीब 11 बजे ट्रक की कमानी की पट्टे फिट हो जाने के बाद दोनो ट्रको के हटने के बाद रास्ता क्लीयर हुआ तो करीब 10 से 11 घंटे तक बंद रहे वाहनो के पहिये आगे बढ़े और मार्ग में आवागमन की व्यवस्था सुचारू हुई। 
 

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Tokyo Olympic 2020: लवलीना बोरगोहेन का दमदार पंच, सेमीफाइनल में प्रवेश कर किया मेडल पक्का


डिजिटल डेस्क, टोक्यो। भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन (Lovelina Borgohain) ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। इसके साथ ही लवलीना ने टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics 2020 ) में भारत का दूसरा पदक सुनिश्चित कर दिया है। 69 किलो वेल्टरवेट कैटेगरी के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने चीनी ताइपे (Chienese Taipei) की निएन चिन चेन (Chen Nien-chin) को 4-1 से मात दी। सेमीफाइनल में लवलीना का मुकाबला बुधवार को मौजूदा विश्व चैम्पियन (World Champion) तुर्की (Turkey) की बुसेनाज सुरमेनेली (busenaj surmenelli) से होगा।

लवलीना ने शुरू से ही मैच में दबदबा बनाए रखा। पहले रांउड में लवलीना अपने प्रतिद्वदी पर भारी पड़ीं। भारतीय बॉक्सर ने कुछ बेहतरीन राइट और लेफ्ट हुक जड़े। दूसरी ओर निएन चेन ने भी अटैक करने की कोशिश की, लेकिन लवलीना के डिफेंस को नहीं भेद पाई। पहले रांउड में तीन जजों ने लवलीना और दो जजों ने विपक्षी मुक्केबाज को बेहतर माना ।

दूसरे राउंड में भारतीय बॉक्सर पूरी तरह चीनी ताइपे की मुक्केबाज पर हावी रहीं। पांचों जजों ने लवलीना के प्रदर्शन को बेहतर माना। दो राउंड में बढ़त हासिल करने के बाद लवलीना ने डिफेंसिव होकर खेलना शुरू कर दिया । निएन चिन चेन (Chen Nien-chin) ने अटैकिंग खेल दिखाते हुए कुछ पंच जड़ने की कोशिश की, लेकिन लवलीना ने इन प्रयासों का खूबसूरती से बचाव किया।

लवलीना बोरगोहोन (Lovelina Borgohain) की निएन चिन चेन (Chen Nien-chin) के खिलाफ यह पहली जीत है। इससे पहले लवलीना ने तीन मौकों पर निएन का सामना किया था, लेकिन उन्हें हार झेलनी पड़ी थी।
 
लवलीना को पहले जज ने 30, दूसरे ने 29, तीसरे ने 28, चौथे ने 30 और पांचवें जज ने 30 अंक दिए । वहीं, निएन चिन को पहले जज ने 27, दूसरे ने 28, तीसरे ने 29  चौथे ने 27 और आखिरी जज ने भी कुल 27 अंक दिए।  

लवलीना बोरगोहेन ओलंपिक की मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय बॉक्सर हैं। इससे पहले विजेंदर सिंह और एमसीसी मैरीकॉम यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं । सबसे पहले विजेंदर सिंह ने बीजिंग ओलंपिक (2008) के मिडिलवेट कैटेगरी में कांस्य पदक जीता था। 2012 के लंदन ओलंपिक में एमसीसी मैरीकॉम ने फ्लाइवेट कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था।  

            ये भी पढ़े-Tokyo Olympics 2020 : लवलीना के जोरदार पंचो ने जगाई मेडल की उम्मीद

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उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: योगी लोकप्रिय, फिर भी बीजेपी में क्यों है हार का डर, ये हैं 6 बड़े कारण

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: योगी लोकप्रिय, फिर भी बीजेपी में क्यों है हार का डर, ये हैं 6 बड़े कारण

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तरप्रदेश में अगले साल यानि कि 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनाव को लगातार दिलचस्प बना रहे हैं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती। अखिलेश यादव की सक्रियता यूपी में देखने लायक है। बहन मायावती भी अब मुख्य चुनावी धारा में वापसी के लिए बेचैन नजर आने लगी हैं। पर मौजूदा हालात को देखते हुए यही कयास हैं कि बीजेपी की ही वापसी होगी। और संभवतः योगी आदित्यनाथ ही बीजेपी का चेहरा भी होंगे। इस चुनाव से पहले बीजेपी राम मंदिर मुद्दे को भी खत्म कर चुकी है। जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है। उसके बावजूद बीजेपी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं बताई जाती। उसकी कुछ ये बड़ी वजह नजर आती हैं-

पूर्वांचल में पुराने साथियों का छूटना

2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल फतह करने के लिए बीजेपी एक नए फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरी थी। बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में उन छोटे राजनीतिक दलों के साथ में गठबंधन किया, जिनका अपना जातिगत वोटबैंक है। इसी फॉर्मूले का फायदा बीजेपी को मिला और बीजेपी को 2017 के विधानसभा चुनाव में 28 जिलों की 170 सीटों में से 115 सीटें मिली थीं। यह नंबर सच में करिश्माई थे लेकिन इस आंकड़े को अकेले बीजेपी ने अपने दम पर हासिल नहीं किया था। उसकी मदद इन छोटे राजनीतिक दलों से जुड़े उनके जातिगत वोटबैंक ने की थी। आइये समझते है पूर्वांचल में इन छोटे राजनीतिक दलों की ताकत जो किसी का भी खेल बना और बिगाड़ सकते हैं। 

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सपा का गठबंधन  

दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है कुछ ऐसा ही हाल अखिलेश यादव का है। 2019 में बसपा का साथ लेकर सपा को जो नुकसान हुआ था। उसके बाद अब अखिलेश 2022 के लिए छोटे छोटे दलों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। सपा ने राष्ट्रीय लोकदल, संजय चौहान की जनतावादी पार्टी और केशव मौर्या की महान दल के साथ में गठबंधन कर लिया है। 

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बनारस, मथुरा, अयोध्या में सपा की बल्ले बल्ले

जिला पंचायत चुनाव में भले ही बीजेपी ने बाजी मारी हो। पर कुछ नतीजे बीजेपी के लिए भी चौंकाने वाले थे। क्योंकि पार्टी को उन जगहों पर झटका लगा था जहां बिलकुल उम्मीद नहीं थी। अयोध्या में मंदिर मसला हल होने का फायदा जिला पंचायत चुनाव के नतीजों में नजर नहीं आया। यहां समाजवादी पार्टी का दबदबा दिखाई दिया। कमोबेश यही नतीजे बनारस और मथुरा में नजर आए। बता दें बनारस पीएम नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट है। 

ayodhya

किसान आंदोलन

देश में किसान पिछले 8 महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश की सियासत पर देखने को मिल रहा है। किसान आंदोलन का सबसे अधिक असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जाट लैंड कहा जाता है, यहां पर एक कहावत कही जाती है कि 'जिसका जाट उसके ठाठ'। इसकी एक वजह यह है कि चौधराहट करने वाले इस समाज के निर्णय से कई जातियों का रुख तय होता है। किसान आंदोलन से यही जाट बीजेपी से खिसकते नजर आ रहे हैं।

kisan

ब्राह्मणों की नाराजगी 

साल 2017 में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की तो राजपूत समुदाय से आने वाले योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। यही वजह है कि योगी सरकार में राजपूत बनाम ब्राह्मण के विपक्ष के नैरेटिव के मद्देनजर ब्राह्मण वोटों का अपने पाले में जोड़ने के लिए बसपा से लेकर सपा और कांग्रेस तक सक्रिय है।  विकास दुबे और उसके साथि‍यों के एनकाउंटर के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में योगी अदित्यनाथ की सरकार में  ब्राह्मणों पर अत्याचार बढ़ने का आरोप लगाया था। ब्राह्मण बुद्धिजीवियों का आरोप है कि एकतरफा समर्थन के बावजूद सरकार में ब्राह्मणों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से किनारे कर दिया गया है। 

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मोदी बनाम योगी!

मोदी और योगी के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में मोदी बनाम योगी को लेकर काफी चर्चाएं हैं। इन चर्चाओं ने ऐसे ही जन्म नहीं लिया है, इनके पीछे कुछ ठोस वजह हैं। हालांकि बीजेपी ने हर बार यही जाहिर किया है कि पार्टी के अंदर ऐसी कोई कलह नहीं है।

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ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

ओलंपिक में जिमनास्टिक खिलाड़ियों ने पहली बार पहने ऐसे कपड़े, जिसने देखा रह गए हैरान

डिजिटल डेस्क, टोक्यो। टोक्यो ओलंपिक में पूरी दुनिया से आए हुए खिलाड़ी अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। खेल में अपनी प्रतिभा दिखाने के अलावा जर्मन की महिला जिमनास्टिक्स ने फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपने मन के कपड़े पहनने की आजादी को अपने खेल के जरिए प्रमोट करने का फैसला किया है, जिससे उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness

जर्मनी की महिला जिमनास्ट रविवार को हुए टोक्यो ओलंपिक मुकाबले में फुल बॉडी सूट पहने नजर आई। खिलाड़ियों ने बताया कि इस सूट को फ्रीडम ऑफ चॉइस यानी अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी को बढ़ावा देने साथ ही महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है जिसे पहनकर महिला खिलाड़ी आरामदायक महसूस कर सकें।

Germany's gymnasts wear body-covering unitards, rejecting 'sexualization' of sport - CNN 
 

जर्मनी की 4 जिमनास्ट जिनके नाम है पॉलीन शेफर-बेट्ज, सारा वॉस, एलिजाबेथ सेट्ज और किम बुई लाल और सफेद रंग के इस यूनिटार्ड सूट में नजर आई जो लियोटार्ड और लेगिंग्स को मिलाकर बनाया गया था। खिलाड़ी इसी को पहन कर मैदान में उतरीं थी। 

German gymnastics team, tired of 'sexualisation,' wears unitards | Deccan Herald
 

जर्मनी की टीम ने अपनी ट्रेनिंग में भी इसी तरह के कपड़े पहने हुए थे और अपने कई इंटरव्यूज में खिलाड़ियों ने कहा था कि इस साल फाइनल कॉम्पटीशन में भी वो फ्रीडम ऑफ चॉइस को प्रमोट करने के लिए इसी तरह के कपड़े पहनेंगी। खिलाड़ी सारा वॉस ने द जापान टाइम्स को बताया था यूनिटार्ड को फाइनल करने से पहले उन्होंने इस पर चर्चा भी की थी। सारा ने ये भी कहा कि जैसे जैसे एक महिला बड़ी होती जाती है, वैसे ही उसे अपने शरीर के साथ सहज होने में काफी मुश्किल होती हैं। हम ऐसा कुछ करना चाहते थे जिसमें हम अच्छे भी दिखे और सहज भी महसूस करें। चाहे वो कोई लॉन्ग यूनिटार्ड हो या फिर शॉर्ट। 

Germany Women's Gymnastics Team Wear Unitards at Olympics | POPSUGAR Fitness
 

सारा ने यह भी बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में भी इसी तरह का फुल बॉडी सूट पहना था और इसका उद्देश्य सेक्सुलाइजेशन को कम करना है। हम लोगों के लिए एक रोल मॉडल बनना चाहते थे जिससे वो हमे फॉलो कर सकें। जर्मन के खिलाड़ियों की लोग काफी प्रशंसा भी कर रहे हैं। 


ओलंपिक प्रतियोगिताओं में जिमनास्ट महिलाओं को फुल या हाफ बाजू के पारंपरिक लियोटार्ड ही पहनना होता है साथ ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में फुल कपड़े पहनने की अनुमति तो है लेकिन किसी भी महिला जिमनास्ट ने इस तरह के कपड़े नहीं पहने थे। यह पहली बार था जब जर्मन खिलाड़ी महिलाओं ने इस तरह के कपड़े पहने थे। 
बीते कुछ सालों में खेल प्रतियोगिताओं में महिलाओं के शारीरिक शोषण के बढ़ते मामलों को देख महिला खिलाड़ियो की चिंता बढ़ती जा रही है अब एथलीटों की सुरक्षा को देखते हुए नए सेफ्टी प्रोटोकॉल बनाए जा रहे हैं।