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5 साल पहले जबलपुर-बिलासपुर मार्ग को एनएच-45 घोषित किया लेकिन अब तक बनना शुरू नहीं हो सका

5 साल पहले जबलपुर-बिलासपुर मार्ग को एनएच-45 घोषित किया लेकिन अब तक बनना शुरू नहीं हो सका

केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई, भूमि अधिग्रहण, वन की भूमि का पैच और बहुत कुछ समस्या के चलते सड़क जस की तस 
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
जबलपुर से कुण्डम, शहपुर डिण्डौरी  होते हुये  बिलासपुर तक अभी जो मौजूदा सड़क है उसको कागजों में तो वर्ष 2016 में हाईवे-45 घोषित कर दिया गया है पर इसके  राष्ट्रीय राजमार्ग में वास्तविक रूप में बदलने की शुरूआत अब तक नहीं हो सकी है। लोक निर्माण एनएच ने जब इस मार्ग को चौड़ा करने को लेकर प्रपोजल भेजा तो केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरा 100 प्रतिशत अमल में लाया जाए। सड़क तभी वास्तविक स्वरूप में बन सकती है जब इसको पूरी चौड़ी करने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो। मार्ग में निजी, वन, नजूल भूमि कई तरह की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। जानकारों का कहना है कि पाँच साल में इस मार्ग को चौड़ा करने का केवल प्रपोजल तैयार हो सका है, इसमें भी अभी कई तरह की कमियाँ हैं। गौर तलब है कि मध्य प्रदेश से छग को सीधा जोडऩे की माँग पर केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पाँच साल पहले जबलपुर-बिलासपुर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया था। शुरूआत में ऐसा लगा जैसे यह सड़क बस कुछ माह में चौड़ी होनी शुरू हो जाएगी पर पाँच साल से ज्यादा समय बीत गया है। अभी जो इस मार्ग से सफर करते हैं वे जानते  हैं कि इससे छग का सफर कितना कष्टदायी है। सड़क में हर पल मोड़ हैं और चौड़ाई भी ऐसी है कि सामने से आ रहे वाहन को जगह दिये बगैर वाहन आगे बढ़ ही नहीं सकता है। लोक निर्माण एनएच के ईई विजय खण्डेलवाल कहते हैं कि सड़क जल्द चौड़ी बने इसको लेकर अब जल्द नया प्रस्ताव बनाकर दिल्ली भेजने वाले हैं। 
इस सड़क की शुरूआत यहाँ से
जिस तरह जबलपुर से कुण्डम, डिण्डौरी, अमरकंटक, बिलासपुर सड़क एनएच-45 कहलाता है तो इसका शुरूआती हिस्सा भोपाल से माना जाता है। पश्चिमी हिस्से में यह औबेदुल्लागंज, बरेली, तेंदुखेड़ा और जबलपुर में अंधमूक चौराहे तक 45 एनएच माना जाता है। पूर्व के हिस्से में यह बिलासपुर से कबीर चबूतरा, सागर टोला, डिण्डौरी, शहपुरा, कुण्डम और फिर जबलपुर तक माना जाता है। इस तरह एनएच-45 की शुरूआत औबेदुल्ला गंज से सीधे जबलपुर और बिलासपुर तक है। नये मार्ग की मार्किंग नये नंबर के अनुसार ही करनी है। वैसे जहाँ नहीं बन सकी है वहाँ पर भी जानकारी के लिए यही नंबर फिलहाल  सड़क पर दर्ज कर दिया गया है। 
दोनों राज्य अपना हिस्सा बनाएँगे
बिलासपुर छग के हिस्से तक करीब 149 किलोमीटर के दायरे में छत्तीसगढ़ इसको हाईवे के रूप में कन्वर्ट करेगा। यह बिलासपुर रतनपुर से शुरू होकर पेण्ड्रा के बाहरी हिस्से कबीर चबूतरा तक है। कबीर चबूतरा से फिर खमरिया- जबलपुर की सीमा तक 190 किलोमीटर मध्य प्रदेश की सीमा में है। दोनों राज्यों को अपने-अपने हिस्से का काम करना है। अनुमति केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने पहले दे दी है लेकिन भूमि न मिलने की वजह से मामला  आगे नहीं बढ़ सका है। मार्ग में जहाँ पर जितना यातायात घनत्व होगा उस हिसाब से इसकी चौड़ाई रखनी है। 
 

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