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 रेत ठेकेदार की मनमानी पर प्रशासन ने लगाया विराम - 8 हजार से अधिक कीमत पर नहीं बेची जायेगी 500 फीट रेत

 रेत ठेकेदार की मनमानी पर प्रशासन ने लगाया विराम - 8 हजार से अधिक कीमत पर नहीं बेची जायेगी 500 फीट रेत

डिजिटल डेस्क सिंगरौली (वैढऩ)। जिले की रेत खदानों के चालू होने के साथ ही खुलेआम लूट का मामला संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर ने बिक्री के लिये दर का निर्धारण कर दिया है। कलेक्टर ने मीटिंग में आरके कांस्ट्रक्शन के ठेकेदार को कड़ी हिदायत देते कहाकि यदि आदेश का उल्लंघन पाया गया तो उसके खिलाफ  सख्त कार्रवाई की जायेगी। सोमवार को कलेक्टर ने जिले में 500 फीट रेत की अधिकतम कीमत 8 हजार निर्धारित की है। कलेक्टर ने बताया कि मंगलवार से जिले में 300 फीट रेत की कीमत 5 हजार लागू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि यह दर खदान से रेत के उठाव के लिये निर्धारित की गई है, यानि खदान से रेत के उठाव पर ठेकेदार निर्धारित दर से अधिक कीमत की आमलोगों से वसूली नही कर सकेगा। जबकि रेत के परिवहन पर आम लोगों को अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ेगा। कलेक्टर ने बताया कि दूरी के आधार पर ठेकेदार आम लोगों से भाड़े की अतिरिक्त राशि वसूल कर सकेगा। अब देखना यह कि ठेकेदार प्रशासन के आदेश को कब तक फॉलो करता है। कलेक्टर ने श्रमिकों से रेत खनन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के भी निर्देश जारी किये हैं।
जरूरतमंदों की पहुंच से बाहर हो गई थी रेत
जिले में एक सप्ताह पहले 17 खदानों के चालू होने के बाद रेत जरूरतमंदों की पहुंच से बाहर हो गई थी। रेत की कीमत का लगातार विवाद गहराने के बाद अब जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया है। बताया जाता है कि खदानों के चालू होने के साथ ही रेत के दाम आसमान छूने लगे थे। इसके चलते सरकारी समेत आम लोगों के निर्माण कार्य ठप हो गये थे। जानकारों का कहना है कि खनन की मंजूरी मिलने के साथ ही ठेकेदार आमलोगों से रेत की मनमाफिक कीमत वसूलने लगा था। इसके चलते रेत के दाम 20 से लेकर 22 हजार प्रति हाइवा पहुंच गये थे।
परिवहन की आड़ में अवैध वसूली की आशंका
सोमवार को प्रशासन द्वारा रेत की कीमत का निर्धारण करने के बाद ठेकेदार द्वारा परिवहन की आड़ में अवैध वसूली किये जाने की आशंका जताई जा रही है। बताया जाता है कि खदान से रेत के उठाव की दर निर्धारित होने के बाद ठेकेदार अब भाड़े में अतिरिक्त राशि की वसूली करने की तैयारी में है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा किलोमीटर के हिसाब से परिवहन की दर तय नहीं करने से ठेकेदार भाड़े से डैमेज कंट्रोल करने की तैयारी में है। इससे आमलोगों को राहत मिलती दिखाई नहीं पड़ रही है। हालांकि प्रशासन अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई किये जाने का दावा कर रहा है। ऐसे में अब देखना यह है कि एकल समूह प्रशासन के आदेश को किस हद और कब तक मानता है?
खदानों में श्रमिकों से लिया जाये काम
जिले में रेत खदानों के संचालन की मंजूरी मिलने के साथ ही इनमें पोकलेन और अन्य मशीनों के उतरने से एक बार फिर विवाद की स्थिति बनती जा रही है। इसके चलते प्रशासन ने रेत खदानों स्थानीय श्रमिकों से काम लिये जाने के ठेकेदार को निर्देश जारी किये हंै। कलेक्टर बताया कि खदानों में स्थानीय लोगों से काम लिये जाने पर उन्हें गांव में ही रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही श्रमिकों का पलायन रूकेगा। जानकारों का कहना है लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में अन्य राज्यों में काम करने वाले श्रमिक जिले में खाली बैठे हंै। ऐसे में रेत खदानों में इनसें काम लिये जाने पर उन्हें अपने घर में ही रोजगार मिलेगा।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बनी सहमति
कलेक्ट्रेट में सोमवार को आयोजित मीटिंग में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कलेक्टर द्वारा दर का निर्धारण किये जाने पर सहमति बनी है। बैठक के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष बीरेन्द्र गोयल, विक्रम सिंह चंदेल सिंह मौजूद रहे। कलेक्टर ने आरकेटीसी के ठेकेदार चंद्रप्रताप सिंह को निर्धारित दर पर खनिज का विक्रय किये जाने के आदेश जारी किये हैं। इस पर जनप्रतिनिधियों ने भी दर निर्धारण पर कलेक्टर की पहल की सराहना की है।
सरकार वही फिर रेत की दर ज्यादा क्यों?
सामाजिक कार्यकत्र्ता एवं अधिवक्ता सत्येन्द्र शाह ने रेत की मनमाफिक दाम पर बिक्री पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहाकि जब प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार बन गई है तो ऐसे में रेत के दाम अचानक कैसे बढ़ गये? उन्होंने कहाकि जब पंचायतों को खदानें स्वीकृत थीं तब कीमत अलग क्यों थी? जबकि सरकार को रायल्टी तक नहीं मिल रही थी। इस बार तो पिछले वर्षों की अपेक्षा ठेका भी कम में हुआ है। 
 

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