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विक्टोरिया में दो डॉक्टरों के बीच गाली-गलौज, धक्का-मुक्की -डीपीएम और संविदा डेंटिस्ट के बीच हुआ विवाद

विक्टोरिया में दो डॉक्टरों के बीच गाली-गलौज, धक्का-मुक्की -डीपीएम और संविदा डेंटिस्ट के बीच हुआ विवाद

डिजिटल डेस्क जबलपुर। जिला अस्पताल स्थित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय के बाहर शुक्रवार को दो डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया, मामला इतना बढ़ा कि  गाली-गलौज से होता हुआ धक्का-मुक्की तक पहुँच गया। मौके पर मौजूद जिला स्वास्थ्य अधिकारी व अन्य सीनियर चिकित्सकों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। इस मामले में वर्तमान में डीपीएम का दायित्व निभा रहे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शलभ अग्रवाल ने सीएमएचओ डॉ. रत्नेश कुररिया को संविदा पर नियुक्त किए गए डेंटिस्ट डॉ. विभोर हजारी के खिलाफ अभद्रता, गाली-गलौज और मारपीट का प्रयास करने संबंधी पत्र लिखा है। 
यह है मामला
विक्टोरिया में यहीं से रिटायर हुए एक भूतपूर्व सीएमएचओ की कामकाज में दखलंदाजी बढ़ गई है, डॉ. शलभ उनके निकट माने जाते हैं जिसके कारण उन्हें डीपीएम का दायित्व मिला। वर्तमान कोविड संकट को देखते हुए डीपीएम जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी अनुभवी से लेकर विवादित कर्मचारी को देने के मामले में कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद भूतपूर्व सीएमएचओ की पसंद पर ही डॉ. अग्रवाल को यह पद दिया गया। हालात यह हैं कि वर्तमान सीएमएचओ डॉ. कुररिया भी कई मामलों में अपने निर्णय लागू नहीं कर पा रहे हैं। चर्चा है कि पूर्व अधिकारी की पसंद पर डीपीएम की जिम्मेदारी मिलने के बाद डॉ. अग्रवाल का व्यवहार साथी चिकित्सकों के साथ ही अन्य कर्मचारियों के लिए भी रूखा और आदेशात्मक हो गया। शुक्रवार को हुए विवाद के पीछे इस व्यवहार को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। 
जानकारी में देरी पर अभद्रता
बताया गया कि कोविड संकट के दौरान संविदा नियुक्ति पर रखे गए डॉ. विभोर को सैम्पल टेस्टिंग की जिम्मेदारी दी गई है। डीपीएम द्वारा उनसे कोई जानकारी माँगी गई, जिसे तैयार करने में विलंब हुआ। कहा जा रहा है कि इसे लेकर डीपीएम द्वारा कुछ अपशब्द कहे गए जिसका डॉ. हजारी ने विरोध किया तो बात गाली-गलौज, धक्का-मुक्की तक पहुँच गई। यहाँ यह महत्वपूर्ण है कि दोनों ही पहले से एक-दूसरे के परिचित हैं तथा उनमें मित्रता भी है। इस संबंध में डॉ. शलभ अग्रवाल से चर्चा करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि इस मामले में सीएमएचओ से ही बात करें।
* - दोनों ही गर्म मिजाज के हैं, उनकी बातचीत की शैली में भी नियंत्रण नहीं है। उन्हें 10 दिन से मैं सुधार के लिए बोल रहा था। यह आचरण ठीक नहीं है, दोनों से इस मामले में जवाब तलब किया जाएगा। दोबारा ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर कार्यवाही होगी। 
-डॉ. रत्नेश कुररिया, सीएमएचओ 
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।