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कटनी भूमि घोटाले पर अब सुनवाई 26 को - सीनियर आईएएस राघवचंद्रा पर हैआरोप 

कटनी भूमि घोटाले पर अब सुनवाई 26 को - सीनियर आईएएस राघवचंद्रा पर हैआरोप 

 डिजिटल डेस्क जबलपुर । कटनी के बहुचर्चित जमीन घोटाले पर हाईकोर्ट में अब 26 मार्च को सुनवाई होगी। कटनी में वर्ष 2000 के बहुचर्चित जमीन घोटाले में फंसे प्रदेश के सीनियर आईएएस मप्र गृह निर्माण मंडल के तत्कालीन आयुक्त राघवचंद्रा पर आरोप है कि उन्होंने इस घोटाले में करीब 5 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने यह निर्देश दिए। कटनी के अरविंद कुमार वर्मा व एक अन्य की ओर से वर्ष 2003 में दायर दो जनहित याचिकाओं में कटनी के जमीन घोटाले को चुनौती दी गई है। आवेदकों का कहना है कि कटनी में आवासीय योजना के तहत कॉलोनी बनाने के लिए निविदाएं बुलाई गईं थीं। उसमें कोलकाता की ऑल्फर्टस कंपनी ने 10 लाख रुपए प्रति एकड़ से भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया, जो मप्र गृह निर्माण मंडल ने स्वीकार कर लिया था। याचिका में आरोप है कि उक्त ऑफर बाजार मूल्य से 10 गुना अधिक था, इसके बाद भी कंपनी को फायदा पहुंचाया गया। इसको लेकर कटनी के तत्कालीन  कलेक्टर शहजाद खान ने आपत्ति भी की, लेकिन कंपनी को 4 करोड़ 95 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया गया। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने 7 सितंबर 2005 को पूरे घोटाले की जांच के आदेश राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषणब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को देकर 4 माह में रिपोर्ट पेश करने कहा था। हाईकोर्ट के आदेश पर ईओडब्ल्यू के तत्कालीन महानिदेशक एआर पवार ने 2 जून 2006 को हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश कर दी थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जो बाद में हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए वापस किया गया था।
मामले पर गुरुवार को आगे हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह, अधिवक्ता अक्षय पवार, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता शशांक शेखर, हाउसिंग बोर्ड की ओर से अधिवक्ता प्रवीण दुबे, अनावेदक ऑल्फर्टस कम्पनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोक श्रीवास्तव, अधिवक्ता कपिल जैन, अनावेदक राघवचंद्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसिल्वा, अधिवक्ता एस ओबेराय और एक हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरूद्दीन हाजिर हुए।
 

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