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सीनियर वेटनरी सर्जन के तबादले पर हाईकोर्ट की सशर्त रोक

सीनियर वेटनरी सर्जन के तबादले पर हाईकोर्ट की सशर्त रोक


डिजिटल डेस्क जबलपुर। जबलपुर से दमोह भेजे गए सीनियर वेटनरी सर्जन के तबादले पर हाईकोर्ट ने सशर्त रोक लगा दी है। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सक्षम अधिकारियों को चार सप्ताह में याचिकाकर्ता के तबादले पर पुनर्विचार करने कहा है। अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि विचार करने के दौरान वेटनरी विभाग की उस पॉलिसी पर भी गौर किया जाए जिसमें विभिन्न कैटेगरी वाले अस्पतालों में ही कर्मचारियों का ट्रांसफर करने कहा गया है। यह याचिका जबलपुर में सीनियर वेटनरी सर्जन के पद पर पदस्थ डॉ. संजय गुप्ता की ओर से दायर की गई थी।
यह कहना था आवेदक का-
आवेदक का कहना था कि 5 जुलाई 2019 को उनका तबादला दमोह कर दिया गया था। तबादले पर सवाल उठाते हुए याचिका में राहत चाही गई थी कि उनका तबादला निरस्त किया जाए। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता एचके उपाध्याय ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका का निराकरण करते हुए विभाग को तबादले पर पुनर्विचार के निर्देश दिए।
ताकि बच्चों की पढ़ाई न हो प्रभावित-
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने मप्र हाईकोर्ट के दो जजों की बैंच द्वारा दिए गए फैसले का हवाला कोर्ट में पेश किया। उस फैसले में हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि उन कर्मचारियों के तबादलों में सरकार विशेष ध्यान दें, जिनके बच्चें 10वीं से 12वीं जैसी महत्वपूर्ण कक्षाओं में पढ़ रहे हों। जहां तक हो सके, उन कर्मचारियों को बिलकुल भी प्रभावित न किया जाए। श्री गांगुली ने कहा कि याचिकाकर्ता का पुत्र भी कक्षा 12वीं में पढ़ रहा है। अब याचिकाकर्ता के तबादले से उनके बच्चे की पढ़ाई प्रभावित होगी। अदालत ने सक्षम अधिकारी को पुनर्विचार के दौरान इस पहलू पर भी विचार करने कहा है।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।