comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

नौकरी दिलाने के नाम पर दो करोड़ की ठगी -प्रदेश और देश की राजधानी में किया कारनामा

नौकरी दिलाने के नाम पर दो करोड़ की ठगी -प्रदेश और देश की राजधानी में किया कारनामा

डिजिटल डेस्क जबलपुर। जबलपुरिया जालसाजों ने भोपाल एवं दिल्ली एम्स में नर्स की नौकरी दिलाने के नाम पर 50 से अधिक युवतियों से दो करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। प्रदेश के विभिन्न इलाकों में रहने वाली युवतियों से इस तीन सदस्यीय गिरोह ने 4 से 6 लाख रुपये लिये थे। जब इस मामले में काफी दिनों तक नौकरी नहीं मिली तो चार युवतियों ने भोपाल एसटीएफ को जालसाज दिलशाद खान एवं उसके साथी आलोक कुमार बामने तथा धर्मानंद के बारे में शिकायत दी। इन आरोपियों के बारे में जब एसटीएफ ने पता लगाया तो जानकारी मिली है कि इस गिरोह का मुखिया दिलशाद जबलपुर का रहने वाला है। इतना ही नहीं धर्मानंद भी जबलपुर का रहने वाला है।एसटीएफ ने इंदौर से भोपाल के बीच यात्रा करते समय गिरोह के सरगना दिलशाद को गिरफ्तार किया तो उसके साथी आलोक कुमार को भेल एरिया से गिरफ्तार किया गया। इस गिरोह के तीसरे सदस्य धर्मानंद की तलाश की जा रही है। धर्मानंद के बारे में जानकारी मिली है कि  दिलशाद के गिरफ्तार होने की जानकारी मिलते ही वह फरार हो गया। 
एम्स में नौकरी दिलाने का झाँसा दिया
इस मामले में भोपाल एसटीएफ एसपी राजेश कुमार  से मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर निवासी दिलशाद पर पहले भी इसी तरह की ठगी  के आरोप लग चुके हैं।  उसने नर्स की ट्रेनिंग करने वाली युवतियों को एम्स में नौकरी दिलाने का झाँसा दिया। कुछ युवतियों को उसने दिल्ली एम्स भी ले जाकर घुमाया। उसने युवतियों को बताया कि एम्स  के डायरेक्टर उसके मित्र हैं। युवतियों ने जब खुद दिल्ली व भोपाल के एम्स जाकर दिलशाद की जान पहचान देखी तो युवतियों के साथ  उनकी परिचितों ने भी नौकरी के नाम पर 4 से 6 लाख रुपये दिलशाद को दे दिये। 
लम्बे समय से ठगी 
 जबलपुर के दिलशाद के बारे में एसटीएफ को जानकारी मिली है कि वह पहले छोटे पैमाने पर नर्सों की भर्ती के नाम पर ठगी करता था। इस बार उसने बड़े पैमाने पर ठगी की है। इस गिरोह का तीसरा सदस्य पकड़ाई में आने के बाद और भी ठगी के  मामले उजागर होने की उम्मीद है। 
5 शादियाँ की - गिरोह के सरगना दिलशाद ने 5 शादियाँ की हैं। इनमें से चौथे नम्बर की पत्नी आयुर्वेदिक डॉक्टर है। वह जबलपुर के आदर्श नगर  में क्लीनिक चलाती है। उसकी 5वें नम्बर की पत्नी भोपाल में रहती है और बाकी चारों पत्नियाँ जबलपुर में ही रहती हैं।  

कमेंट करें
wYtKf
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।