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महाराष्ट्र की राजनीति में धमक है कुछ खास परिवारों की ,जानिए इन परिवारों का राजनीतिक सफर

महाराष्ट्र की राजनीति में धमक है कुछ खास परिवारों की ,जानिए इन परिवारों का राजनीतिक सफर

डिजिटल डेस्क,खामगांव (बुलढाणा)। राजनीतिक में  यूं तो परिवारवाद का विरोध कुछ पार्टियां करती रही है बावजूद इसके  पार्टियों में  परिवारवाद बना हुआ है। महाराष्ट्र की राजनीति में जिन परिवारों का दबदबा है, उनका जिक्र यहां जरूरी है, क्योंकि इस चुनाव में उनकी भागीदारी भी है। कुछ ऐसे ही परिवारों की बानगी-

ठाकरे परिवार
बालासाहेब ठाकरे ने 1966 को शिवसेना का गठन किया। ठाकरे परिवार की राजनीतिक विरासत उनके बेटे उद्धव ठाकरे के हाथों में है और वे शिवसेना के कार्याध्यक्ष हैं, जबकि भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना से राजनीतिक पारी का आगाज किया, लेकिन बाद में महाराष्ट्र निर्माण सेना (मनसे) के नाम से अलग पार्टी गठन कर ली। राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी सक्रिय राजनीति में हैं। ठाकरे परिवार में चुनाव न लड़ने की परंपरा से अलग हटकर 53 साल के बाद ठाकरे परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य और बालासाहब के पोते आदित्य ठाकरे ने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला लिया।

पवार परिवार
शरद पवार की मां शारदा बाई 1936 में पुणे लोकल बोर्ड की सदस्य थीं। शरद पवार 38 साल की उम्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए और चार बार सीएम रहे। कांग्रेस से राजनीतिक पारी शुरू करने वाले शरद पवार ने 1999 में एनसीपी का गठन किया। अजित पवार और सुप्रिया सुले भी सक्रिय हैं। परिवार का राजनीतिक प्रभाव मराठवाड़ा के बारामती और ग्रामीण पुणे में है।

मुंडे परिवार
गोपीनाथ मुंडे महाराष्ट्र के गृह मंत्री और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री रहे। 2014 में कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया। बड़ी बेटी पंकजा महाराष्ट्र में कैबिनेट मंत्री हैं और दूसरी बेटी प्रीतम बीड़ से सांसद हैं, जबकि भतीजे धनंजय मुंडे एनसीपी से विधान परिषद सदस्य हैं। मुंडे परिवार का राजनीतिक प्रभाव बीड जिले के आस-पास के इलाकों में है।

चव्हाण परिवार
पूर्व मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण 1975 और 1986 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहने के साथ केंद्र में वित्त और गृह मंत्रालय जैसे विभाग भी संभाल चुके हैं। राजनीतिक विरासत अशोक चव्हाण के हाथों में रही है और 2008 से 2010 के बीच वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। अशोक चव्हाण की पत्नी अमिता भी विधायक रह चुकी हैं।

राणे परिवार
नारायण राणे ने 1968 में शिवसेना ज्वाइन किया और 1990 में पहली बार विधायक चुने गए। शिवसेना-बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री भी बने। 2005 में उन्होंने शिवसेना छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली। फिर 2017 में अलग पार्टी बना ली। अभी राज्यसभा सदस्य हैं। राजनीतिक विरासत बेटे नीलेश राणे आगे बढ़ा रहे हैं। 

भुजबल परिवार
छगन भुजबल 1985 में मुंबई के मेयर बने और बाद में एनसीपी का दामन थाम लिया। इसके बाद वे महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री भी बने। भुजबल की राजनीतिक विरासत उनके बेटे पंकज भुजबल आगे बढ़ा रहे हैं। वे नाशिक से सटे जलगांव के नादगांव से विधायक हैं, जबकि भतीजे समीर 2009 में सांसद रह चुके हैं। 

शिंदे परिवार
महाराष्ट्र में एक सब-इंस्पेक्टर से देश के गृहमंत्री तक का सफर करने वाले कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। सुशील कुमार शिंदे की राजनीतिक विरासत उनकी बेटी प्रणीति शिंदे संभाल रही हैं। वह सोलापुर विधानसभा सीट से विधायक हैं।

विखे परिवार
बालासाहेब विखे पाटील अहमदनगर उत्तर से 7 बार विधायक रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। बेटे राधाकृष्ण महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष थे। इन्होंने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बने। बहू शालिनी राधाकृष्ण अहमदनगर की जिला परिषद अध्यक्ष और पोते सुजय पाटील अहमदनगर सीट से बीजेपी के सांसद हैं। 

निलंगेकर परिवार
शिवाजी निलंगेकर 1985-86 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। जिले की निलंगा विस सीट पर 1999 से निलंगेकर परिवार के सदस्य ही चुने जाते रहे हैं। राजनीतिक विरासत बेटे दिलीप निलंगेकर के हाथों में है, जो फिलहाल विधायक हैं। बहू रूपा सांसद रह चुकी हैं और पोते संभाजी निलंगेकर अभी फडणवीस सरकार में मंत्री हैं।

देशमुख  परिवार
महाराष्ट्र के लातूर में जन्मे विलासराव देशमुख ने पंचायत से राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की। वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी बने। उनके निधन के बाद राजनीतिक विरासत उनके बेटे अमित देशमुख और धीरज देशमुख संभाल रहे हैं, जबकि रितेश फिल्म अभिनेता हैं।  

वसंतदादा पाटील परिवार
वसंत दादा 1977 और 1983 में दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं और मौजूदा समय में पाटील परिवार की तीसरी पीढ़ी महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय है। वसंतदादा पाटील की पत्नी शालिनी ताई भी कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं। बेटे प्रकाश और पोते प्रतीक सांगली से सांसद रह चुके हैं।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।