दैनिक भास्कर हिंदी: एक ही आईएमईआई नंबर पर चल रहे एक लाख से अधिक मोबाइल

November 8th, 2019

डिजिटल डेस्क जबलपुर। मोबाइल फोन में एक यूनिक आइडी आईएमईआई होती है जो कि मोबाइल को एक विशिष्ट पहचान देती है। इसे बदलना या छेडख़ानी करना अपराध है इसके बावजूद ओमती थाना क्षेत्र में जयंती कॉम्प्लेक्स स्थित सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप में यह गोरखधंधा किया जा रहा था। उक्त जानकारी एक पत्रवार्ता में आईजी विवेक शर्मा, एसपी अमित सिंह ने देते हुए बताया कि जोनल साइबर पुलिस ने इस गोरखधंधे का खुलासा करते हुए एक ही आईएमईआई नंबर पर 1 लाख से अधिक मोबाइल संचालित होने का पता लगाया है और करीब 50 हजार नंबरों की सूची तैयार की है। साथ ही सवा सौ मोबाइल जब्त किए हैं जो कि एक ही आईएमईआई नंबर से चल रहे थे।  इस संबंध में बताया गया कि मोबाइल के आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ कर पहचान परिवर्तित किए जाने की कई शिकायतें मिल रही थीं। इस जानकारी को गंभीरता से लेते हुए जोनल साइबर सेल की एक टीम गठित कर पतासाजी में लगाई गई थी। इस मामले की गोपनीय तरीके से जाँच करते हुए टीम ने साक्ष्य एकत्र किए और सिद्धि विनायक मोबाइल शॉप के संचालक प्रदीप ठाकुर को गिरफ्तार कर पूछताछ करते हुए आईएमईआई बदलने के उपकरण आदि जब्त कर मामला दर्ज किया है।  
एक लाख से अधिक मोबाइलों की जानकारी -उन्होंने बताया कि जोनल साइबर सेल के द्वारा इस आईएमईआई नंबर   की ऑल इंडिया सर्च कराने पर पाया गया कि देश भर में 1 लाख से अधिक मोबाइल उपकरण एक ही आईएमईआई नंबर   पर चल रहे हैं। पुलिस द्वारा ऐसे 125 से अधिक मोबाइल उपकरणधारकों से सम्पर्क करते हुए जाँच के लिए मोबाइल जब्त किए गये हैं। एक ही नंबर के इन मोबाइलों में धारकों में किसी को मोबाइल सड़क पर मिलने व सेकेंड हैंड सेट क्रय किया जाना बताया गया है। 
मुख्यालय को भेजी गयी सूची - इस संबंध में बताया गया कि सुरक्षा की दृष्टि से इसे गंभीर खतरा मानकर या फिर मोबाइल चोरी के होने या अन्य अपराधों से संबंधित होने की आशंका के चलते और पहचान छुपाने की नीयत से आईएमईआई नंबर बदले जाने की आशंका नजर आने पर पुलिस द्वारा करीब 50 हजार नंबरों की सूची तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेजी गयी है। जानकारों के अनुसार इस गोरखधंधे का खुलासा एक मोबाइल उपभोक्ता अनिल पटैल द्वारा विनायक शॉप से मोबाइल खरीदने पर हुआ था। उसका मोबाइल बिगडऩे पर उसने उसी दुकान से मोबाइल रिपेयर कराया था। उसके बाद मोबाइल खोलकर देखने पर आईएमईआई नंबर में संदेह होने पुलिस को शिकायत की थी। 
गृह मंत्रालय तक हड़कम्प

जानकारों के अनुसार देश भर में एक ही आईएमईआई नंबर पर 1 लाख से अधिक मोबाइल चलने की जानकारी पुलिस मुख्यालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गयी है, ताकि देश भर में चल रहे इन मोबाइलों को नेटवर्क से बाहर किया जा सके। साइबर जाँच के दौरान आरोपी ने कबूल किया है िक वह किसी भी मोबाइल का सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर के माध्यम से क्रेक कर आईएमईआई नंबर बदल देता था, वहीं इस प्रक्रिया से नंबर चेंज नहीं होने पर दूसरे फोन का मदर बोर्ड फोन में लगाकर उसका आईएमईआई नंबर बदल देता था।   

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