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कहर ढा रहे मच्छर, इनके काटने से 40 दिनों तक बना रहता है खतरा, अब निगम ने खात्मे के लिए संभाला मोर्चा

कहर ढा रहे मच्छर, इनके काटने से 40 दिनों तक बना रहता है खतरा, अब निगम ने खात्मे के लिए संभाला मोर्चा

खाली प्लॉटों, गड्ढों,  तालाबों और नालियों पर भी दिया ध्यान, कई चोक नाले भी खुलवाए गए, जहाँ भी पानी का जमाव हो ऐसी जगहों को चिन्हित करने के निर्देश
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
सड़कों पर ही नजर रखते हुए नगर निगम सोच रहा था कि मच्छरों का खात्मा हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, बल्कि मोटे और बड़े मच्छरों ने शहर में कहर ढा दिया। हर तरफ इन मच्छरों के आतंक की ही चर्चा होने लगी और लोग डर गए। इसे देखते हुए अब नगर निगम ने मच्छरों के पैदा होने वाले स्थानों पर हमला किया है, ताकि उनके लार्वा को ही समाप्त कर दिया जाए। मंगलवार को निगम की टीमों ने शहर के कई स्थानों पर नालों और नालियों में जला ऑयल डाला, ताकि लार्वा वहीं मर जाए, जहाँ भी पानी का जमाव है उन स्थानों की सूची बनवाई जा रही है और वहाँ कीटनाशकों का छिड़काव कराया जा रहा है। शाम को फॉगिंग का धुआँ भी ऐसे ही स्थानों पर कराया गया जिससे अब उम्मीद जागी है कि मच्छरों के आतंक में कुछ कमी आएगी। 
दो साल पहले अक्टूबर, नवम्बर और दिसम्बर का ही समय था जब डेंगू और चिकनगुनिया ने शहर को रुला दिया था। हजारों की संख्या में लोग इन बीमारियों से ग्रसित हुए थे और अस्पतालों में मरीजों की बाढ़ आ गई थी। फिर वही समय लौटा और मच्छरों की तादाद तेजी से बढ़ी। यह अलग बात है कि अभी इन बीमारियों का फैलाव तेजी से नहीं हो पा रहा है, लेकिन यह भी सच है कि मच्छरों के काटने के 40 दिनों तक बीमारियों का खतरा रहता है। खैर निगम अधिकारी जाग गए हैं और उन्होंने पहल करते हुए मच्छरों के हमले का करारा जवाब देना शुरू कर दिया है। 
 निगमायुक्त ने कहा अभियान लगातार चलाया जाए
नगमायुक्त अनूप कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश िदए कि मच्छरों के लार्वा विनष्टीकरण का कार्य तेजी से किया जाए और खासकर उन्हीं स्थानों पर ध्यान दिया जाए जहाँ मच्छर पैदा होते हैं। निगमायुक्त के आदेश पर  मच्छरों के विनष्टीकरण और लार्वा नष्ट करने के लिए नगर निगम द्वारा एक साथ सभी 16 संभागों में व्यापक अभियान शुरू किया गया है। खाली भू-खण्डों, नाला-नालियों एवं गड्ढों में जला हुआ ऑयल डलवाया जा रहा है, ताकि मच्छर पैदा ही न हों। 
चोक नाला खुलवाया गया 
 संभाग क्रमांक 15 के महाराजपुर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के अनेक वर्षों से चोक नाले को भी खुलवाया गया, जिससे क्षेत्रीय नागरिकों को राहत पहुँची है। इस चोक नाले में हमेशा पानी भरा रहता था जिससे उसमें मच्छरों की बम्पर पैदावार हो रही थी। िनगम की टीम ने नाले की सफाई की और पानी की निकासी करा दी। 
सिविक सेंटर नाले में डाला गया ऑयल 
 सिविक  सेंटर में सुबह से ही निगम का अमला सक्रिय रहा और यहाँ के नाले के साथ ही नालियों में भी जला ऑयल डाला गया। यह ऑयल पानी में एक लेयर बना लेता है जिससे मच्छरों के लार्वा साँस नहीं ले पाते हैं और वे नष्ट हो जाते हैं। शाम को धुआँ कर पूरे क्षेत्र को मच्छरों से मुक्त करने का प्रयास किया गया। 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।