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मां की शरीर की गर्मी नवजात के लिए रक्षक , कंगारु मदर केयर बना संजीवनी

मां की शरीर की गर्मी नवजात के लिए रक्षक , कंगारु मदर केयर बना संजीवनी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए मेडिकल में कंगारू मदर केयर की मदद ली जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी  कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की देखभाल में कंगारू मदर केयर की मदद लेने आह्वान कर चुका है। मेडिकल में पीडियाट्रिक विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति जैन के अनुसार, अस्पताल ले जाते समय मां को नवजात शिशु को अपने से सटाकर रखना चाहिए। ऐसे में मां की शरीर की गर्मी उसके लिए रक्षक साबित हो सकती हैैैैैैैैैैैैैैैैैैै। उसे कंगारू बैग या किसी कपड़े की मदद से छाती से सटाकर बांध लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि कंगारू केयर के तहत नवजात शिशु काे कपड़े के बैग की मदद से मां या किसी अन्य परिजन जैसे दादी या नानी, यहां तक कि पिता के शरीर के पास रखा जाता है। इससे बच्चे के शरीर को गर्मी मिलती रहती है और शरीर का तापमान कम नहीं हो पाता है। शिशु का इंम्युन सिस्टम भी मजबूत होता है। 

नागपुर में स्थिति बेहतर
 पब्लिक हेल्थ विभाग के अनुसार, अप्रैल 2019 से नवबंर 2019 तक नागपुर विभाग में उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले नवजात की मृत्यु दर 3.06 है। 2019 में जुलाई से दिसंबर तक मेडिकल के पीडियाट्रिक विभाग मंे कुल 1021 बच्चे भर्ती हुए थे। इनमें से 168 की मौत हुई है। यह आंकड़ा वर्ष 2018 में 1051 और 202 था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन कर चुका है सिफारिश
बर्गन युनिवर्सिटी के सेंटर फाॅर इंटरवेंशन साईंस इन मैटेरनल एंड चाइल्ड केयर की ओर किए गए रिसर्च में कंगारू केयर को कम वजन के साथ पैदा हुए बच्चों के लिए बेहतरीन केयर माना गया है। रिसर्च के अनुसार, इस आसान और कम खर्चीले तकनीक को अपनाकर कम वजन के 40 फीसदी बच्चों की जान बचाई जा सकती है। विश्व भर हर वर्ष 2 करोड़ बच्चे कम वजन के साथ जन्म लेते हैं और इनमें आधे से ज्यादा बच्चों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कंगारू मदर केयर अपनाकर इनमें से 40 फीसदी बच्चों को बचाया जा सकता है।

मदर केयर काफी प्रभावी 
कंगारू मदर केयर इंटेसिव केयर में भर्ती शिशुओं के साथ-साथ वार्ड में भर्ती बच्चों की देखभाल के लिए अपनाया जा रहा है। इंटेसिव केयर में फिलहाल भर्ती 15 शिशुओं की प्रभावी देखभाल मेें कंगारू मदर केयर काफी प्रभावी रहा है। अस्पताल में आए नवजात की मांओं को हर दिन इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित माताओं को घर जाने के बाद आसपास के लोगों को यह तकनीक बताते के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। विभाग में अंदर आने के पहले संक्रमण संबंधी सावधानी बरतने पर ध्यान दिया जाता है। 
-डॉ. स्वनिल भिसेकर, डीएम नियोनेटल विभाग मेडिकल

ठंड के पहले विशेष तैयारी
डॉ. जैन के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से नागपुर में ज्यादा ठंड पड़ रही है। ऐसे में विभाग बच्चों की देखभाल के लिए विशेष रूप से तैयारी करता है। विभाग में कुल 16 वार्मर हैं। इनमें से पांच इस वर्ष मंगवाए गए हैं। इनमें से फिलहाल 11 काम कर रहे हैं। यंत्रों के साथ-साथ स्टॉफ और बच्चे के परिजन को ठंड में बच्चों की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। संक्रमण के बचाव पर विशेष जोर दिया जाता है। -डॉ. दीप्ति जैन, प्रमुख पीडियाट्रिक विभाग, मेडिकल

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।