comScore

अब प्रदेश में तेल कंपनियों को पेट्रोल में ईथोनोल मिलाने का लायसेंस नहीं लेना पड़ेगा

September 01st, 2018 12:26 IST
अब प्रदेश में तेल कंपनियों को पेट्रोल में ईथोनोल मिलाने का लायसेंस नहीं लेना पड़ेगा

डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश में अब तेल कंपनियों को पैट्रोल में ईथोनोल मिलाने का लायसेंस राज्य के आबकारी कार्यालय से नहीं लेना होगा। यही नहीं, तेल कंपनियों को ईथोनोल का आयात करने एवं परिवहन का भी कोई शुल्क आबकारी कार्यालय को भुगतान नहीं करना होगा। इसके लिये राज्य सरकार ने मप्र आबकारी अधिनियम 1915 के तहत 58 साल पहले बने विप्रकृति (डिनेचर्ड) स्प्रिट नियम 1960 में संशोधन कर दिया है।

दरअसल ईथोनोल एक प्रकार का अल्कोहल होता है, जिसका उपयोग मदिरा निर्माण में होता है। यह बायो फयूल का भी काम करता है। इसे मानव के सेवन से रहित बनाकर पैट्रोल में मिलाने का काम किया जाता है। उक्त नियमों में वर्ष 2004 से प्रावधान किया गया था कि पैट्रोल में ईथोनोल को मिलाने के लिये मेनुफैक्चरिेंग तेल कंपनियों को इसका राज्य के आबकारी कार्यालय से लायसेंस लेना होगा तथा ईथोनोल के आयात एवं परिवहन पर भी निर्धारित आबकारी शुल्क का भुगतान करना होगा।

चूंकि अब देश में पैट्रोल निरन्तर मंहगा होता जा रहा है और बायो फ्यूल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर पैट्रोल के दामों को कम करना है, इसलिये केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि वे ईथोनोल को पैट्रोल में मिक्स करने का लायसेंस लेने एवं इसके आयात व परिवहन पर शुल्क लेने की अनिवार्यता समाप्त करे ताकि बायो फ्यूल के उपयोग को प्रोत्साहन मिल सके। इसी कारण अब राज्य सरकार ने उक्त नियमों में संशोधन कर ईथोनोल को पैट्रोल में मिलाने का लायसेंस लेने और इसके आयात व परिवहन पर आबकारी शुल्क देने की अनिवार्यता का प्रावधान खत्म कर दिया है। इससे राज्य की तेल कंपनियों को अब आगे से ईथोनोल को पैट्रोल में मिलाने का लायसेंस नहीं लेना पड़ेगा और इथोनोल के आयात व परिवहन करने पर आबकारी शुल्क भी नहीं देना होगा।

ज्ञातव्य है कि ईथोनोल को पैट्रोल में मिक्स करने हेतु तेल कंपनियों को दस हजार रुपये सालाना एवं 50 हजार रुपये पांच साल हेतु लायसेंस फीहस देना पड़ रही थी और एक से तीन रुपये प्रति लीटर तक ईथोनोल के आयात एवं परिवहन का शुल्क देना पड़ रहा था। इनका कहना है : ‘‘केंद्र सरकार ने बायो फ्यूल के उपयोग को प्रोत्साहन देने के लिये कहा है। इसलिये ईथोनोल जोकि एक प्रकार का अल्कोहल होता है, को पैट्रोल में मिक्स करने का लायसेंस लेने एवं इसके आयात व परिवहन का शुल्क देने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है।’’ -
वीके सक्सेना, उपायुक्त आबकरी भोपाल

कमेंट करें
Sq3nP
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।