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ओएफके में 30 प्रतिशत प्रॉफिट पर मिलेंगे ओटी के 51 घंटे - श्रमिक नेताओं की निर्माणी प्रशासन से चर्चा

ओएफके में 30 प्रतिशत प्रॉफिट पर मिलेंगे ओटी के 51 घंटे - श्रमिक नेताओं की निर्माणी प्रशासन से चर्चा

डिजिटल डेस्क जबलपुर । ओएफके श्रमिक  संगठनों और प्रशासन के बीच चल रही तनातनी पूरी तरह खत्म हो गई। शिफ्टों में बदलाव को लेकर नाराजगी रखने वाले कामगार और एससी-एसटी यूनियन की माँग पर जीएम ने कहा कि उत्पादन सेक्शन अगर 30 प्रतिशत प्रॉफिट देते हैं तो उन्हें 51 घंटों का ओवर टाइम दिया जा सकता है। दोनों के लिए फायदे का मुद््दा आते ही गिले-शिकवे दूर हो गए और श्रमिक नेताओं ने पूरे सहयोग का भरोसा भी दिया। आयुध निर्माणी की तीन शिफ्टों पर कड़े एतराज के साथ मीटिंग सुबह तकरबीन ढाई बजे से शुरू हुई। श्रमिक नेताओं ने कहा कि तीन शिफ्टें स्वीकार नहीं की जाएँगी। यह भी एतराज रहा कि शिफ्ट ड्यूटी के समय में आंशिक परिवर्तन कर दूसरे संगठनों के श्रमिक नेताओं को भ्रमित किया गया जिससे उनका विरोध प्रदर्शन भी रद््द हो गया। डेढ़ घंटे चली मीटिंग में राकेश शर्मा, रूपेश पाठक, राजेन्द्र चड़ारिया, प्रेमलाल सेन, विजय भावे, केके शर्मा, सतिन शर्मा मौजूद रहे।  
नेता अड़े रहे, जीएम बोले
 22 से मुमकिन- कामगार यूनियन के श्रमिक नेता जब शिफ्ट ड्यूटी हर हाल में बन्द करने की जिद पर अड़े रहे तब जीएम ने भरोसा दिया कि 22 जून से सामान्य पाली प्रारंभ की जा सकती है। सहायक श्रम कल्याण आयुक्त ने भी महामारी के चलते सहयोगात्मक रवैए की अपील की। इसके बाद श्रमिक नेता कुछ नरम हुए।
राजनीति नहीं श्रमनीति हमारा धर्म  
कामगार यूनियन ने अपने एक वक्तव्य में कहा है कि हम राजनीति नहीं श्रमनीति करते हैं। निगमीकरण के मुद््दे पर अंतिम साँस तक संघर्ष करेंगे।  यह भी कहा गया है कि मात्र दो-चार माँगों के पूरा हो जाने पर स्वयं की पीठ न थपथपाएँ, बल्कि श्रमिकों को भविष्य के आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए। कामगार यूनियन निर्माणी के स्थानीय मुद््दों पर ठग गठबंधन के साथ नहीं है और भविष्य में भी नहीं रहेगी। राष्ट्रीय मुद्दों पर कामगार अन्य संगठनों से पूर्ण सहयोग की अपील करता है।

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