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 धान की हाईब्रिड के लिए सतना के किसानों को नहीं मिलेगा सब्सिडी का लाभ

 धान की हाईब्रिड के लिए सतना के किसानों को नहीं मिलेगा सब्सिडी का लाभ

डिजिटल डेस्क सतना। खरीफ सीजन में धान की उपज जिले की प्रमुख फसल भले ही हो, लेकिन सतना के किसानों को धान की हाईब्रिड के लिए सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। राज्य शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की स्टेट लेवल कमेटी ने अबकि एनएफएसएम (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन) की लिस्ट से सतना जिले का नाम उड़ा दिया है। नतीजा यह है कि कम्पोजिट नर्सरी तैयार करने के लिए किसानों को मिलने वाला उन्नत किस्म का बीज तैयार करने के लिए सौ फीसदी सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। किसान अगर उन्नत बीज चाहते हैं तो उन्हें बाजार  में मुंहमांगी कीमत चुकानी पड़ेगी। बाजार का मूल्य वैसे भी नियंत्रण में नहीं है। उल्लेखनीय है, धान की बोनी के लक्ष्य के हिसाब से किसानों को 34 हजार 560 क्ंिवटल उन्नत किस्म के बीज की जरुरत होगी।    
मुख्य फसल फिर भी उपेक्षा 
जिले में खरीफ सीजन के दौरान अबकि कुल 3 लाख 30 हजार हेक्टेयर पर भूमि आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें से 50 फीसदी से भी ज्यादा भूभाग पर अकेले धान की फसल ली जानी है। धान यहां की मुख्य फसल होने के बाद भी सतना के किसानों की उपेक्षा की गई है। उल्लेखनीय है, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत अभी तक सौ फीसदी सब्सिडी के तहत कृषि विभाग जिले के हर ब्लाक में 50 किसानों को 150 क्विंटल प्रामाणिक बीज उपलब्ध कराता था। जिससे एक किसान लगभग 8 एकड़ के लिए  बेहन (रोपा) तैयार करता था।इस तरह से एक ब्लाक के 400 किसानों को रोपा उपलब्ध कराया जाता था। इसी मान से जिले के सभी 8 ब्लाक के किसानों को भी लाभान्वित किया जाता था। मगर, अब ऐसा नहीं होगा।  
और तो और कोदो-कुटकी का भी पत्ता कटा 
सरकारी उपेक्षा की हद तो ये है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सतना जिले के किसानों को अकेले धान के उन्नत बीज से ही वंचित नहीं किया गया है, बल्कि मक्का, ज्वार,कोदो और कुटकी जैसे अनाज के उन्नत बीजों की सब्सिडी का लाभ भी छुड़ा लिया गया है। मक्का के उन्नत बीजों के सवाल पर सतना समेत जहां समूचा रीवा संभाग गायब है। वहीं ज्वार,कोदो और कुटकी के प्रमाणिक बीजों का लाभ संभाग के रीवा, सीधी और सिगरौली को तो दिया गया है लेकिन इन जिन्सों में भी सतना जिले का पत्ता साफ कर दिया गया है।
उपज में आएगी गिरावट : लक्ष्य में भी 4 प्रतिशत की कटौती 
खरीफ की जिले में प्रमुख फसल धान के उत्पादन में अबकि भारी गिरावट की आशंका है। कृषि विभाग ने विगत खरीफ सीजन की तुलना में अबकि जहां धान के उपज के रकबे में 4 प्रतिशत की गिरावट कर दी है, वहीं किसानों को सौ फीसदी सब्सिडी पर मिलने वाले उन्नत बीज के लाभ से वंचित कर दिया है। रही-सही कसर टिड्डी दल भी पूरी कर सकता है। टिड्डी दल के दुष्परिणाम पूरे जिले को भुगतने पड़ेंगे। हालांकि  किसानों को खेतों की गहरी जुताई और बीज तथा तथा रोपा के ट्रीटमेंट की सलाह दी गई है।  
  अब कहां गई किसानों के नाम पर वोट की सियासत 
 आंदोलन की चेतावनी
 खरीफ सीजन में जिले के किसानों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन से बाहर कर  धान के उन्नत बीजों की सब्सिडी से वंचित किए जाने से भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश सिंह खासे खफा हैं। उन्होंने सवाल उठाए कि अब वो नेता आखिर कहां गए जो किसानों के नाम पर सिर्फ वोट की राजनीति करते हैं? उन्होंने कहा कि जब किसानों का वास्तव में मदद की जररुत होती है तो सक्रिय सियासत को भी सांप सूख जाता है। श्री सिंह ने राज्य सरकार से हाईब्रिड धान उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में किसानों को सब्सिडी का शत-प्रतिशत लाभ दिए जाने की मांग की है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर किसानों की उपेक्षा की गई तो सामाजिक दूरी के पालन के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए आंदोलन किया जाएगा।
 

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