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स्कूल फीस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों को दिया झटका

स्कूल फीस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों को दिया झटका

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल फीस मामले में अभिभावकों को बड़ा झटका दिया है। निजी स्कूलों द्वारा 1 अप्रैल से 1 जुलाई तक लॉकडाउन के दौरान तीन महीने की अवधि के लिए पूरी फीस वसूलने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से कोर्ट ने साफ इंकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हर राज्य की स्थिति अलग है, उसे संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट में ही उठाया जाए।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस सुभाष रेड्‌डी की पीठ ने शुक्रवार को विभिन्न राज्यों के पेरेट एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि पीठ याचिका पर विचार करने के लिए इच्छूक नहीं है और वह इस मुद्दे की योग्यता में नही जाना चाहती। इसलिए याचिकाकर्ता संबंधित राज्यों के उच्च न्यायालयों का रुख कर सकते है। अगर हाईकोर्ट के आदेश के साथ कोई समस्या है तो ही सुप्रीम कोर्ट आया जाए। हर राज्य की स्थिति अलग होने के कारण पूरे देश पर लागू होने वाला कोई एक आदेश नहीं दिया जा सकता।

दरअसल, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश समेत 9 राज्यों के पेरेंट एसोसिएशन ने इस मसले पर जनहित याचिका दायर कर संविधान के तहत ग्ररंटीकृत जीने के साथ-साथ शिक्षा के मौलिक अधिकार की सुरक्षा की मांग की थी। याचिका में कहा गया कि कोरोना महामारी की स्थिति के कारण वह इस अधिकार से वंचित हो रहे है। साथ ही याचिका में कहा गया कि वे जीवन और शिक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए मिलकर सुप्रीम कोर्ट आए हैं और कोरोना महामारी के चलते स्कूलों में पढ़ रहे बारहवीं तक के छात्रों के बहुत से अभिभावकों की फीस देने की आर्थिक क्षमता नही रही है उन्हें बच्चों को स्कूल से निकालने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

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