दैनिक भास्कर हिंदी: मप्र के स्कूलों के हालात खराब, पेड़ के नीचे लग रही पाठशाला, शिक्षक भी नहीं

October 31st, 2019

डिजिटल डेस्क शहडोल/जैतपुर। शिक्षा को बढ़ावा देने का राग अलापने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से अनजान हैं। उन्हें मालूम नहीं कि स्कूलों में व्यवस्थाएं कैसी हैं। मप्र के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्कूल पेड़ के नीचे लग रहे हैं। मामला मप्र के शहडोल जिले के जैतपुर अंतर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक स्कूल  चैन टोला का है। वहीं अधिकारी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
जिले के तहसील मुख्यालय जैतपुर अंतर्गत एक ऐसा शासकीय स्कूल है जहां के बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। ग्राम पंचायत बिरौड़ी अंतर्गत चैन टोला में संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन आज तक नहीं बन पाया है। गांव की बस्ती में एक घर के सामने सड़क किनारे पेड़ की छांव में कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं। बरसात के दिनों में कक्षाएं लगभग बंद सी रहती हैं। एक ग्रामीण द्वारा अपना मकान दिया गया था लेकिन अब किराए की मांग को लेकर बंद कर दिया है।  यही नहीं इस स्कूल में आज तक एक भी नियमित शिक्षक की पदस्थापना नहीं की गई है। मात्र दो अतिथि शिक्षकों के भरोसे बच्चों का भविष्य बनाया जा रहा है। इस समस्या से प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारी भली भांति परिचित हैं इसके बाद भी बच्चों के हित में कोई पहल शुरु नहीं की गई। चैन टोला में वर्ष 2013-14 से प्राथमिक विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में 21 बच्चे पढ़ाई करने आते हैं। बस्ती में स्कूल संचालन कराने का फरमान जारी तो कर दिया गया परंतु भवन और शिक्षक देना ही भूल गए। वर्तमान में दो अतिथि शिक्षक कमान संभाले हुए हैं।
मूलभूत सुविधा भी नहीं-
विद्यालय के अपना न तो फर्नीचर है और न ही रिकार्ड। स्कूल के दस्तावेज संकुल केंद्र साखी जो यहां से करीब 4 किलोमीटर दूर है, वहां रखे जाते हैं। सीएसी बीच-बीच में आकर जायजा लेते रहते हैं। भवन के अलावा खेल मैदान की कमी बनी हुई है। बच्चे किसी प्रकार की खेल गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पाते। टॉयलेट भी आधा किलोमीटर दूर शासकीय जमीन पर बनाया गया है। जिसका उपयोग करने बच्चे वहां नहीं जा पाते। मध्याह्न भोजन भी भगवान भरोसे चल रहा है। अन्नूपूर्णा स्व सहायता समूह द्वारा मनमाने तरीके से भोजन दिया जाता है। कक्षा 5वीं की छात्रा आरती सिंह व सविता सिंह ने बताया कि वे पढऩा तो चाहती हैं लेकिन खुले में कक्षा लगने से परेशानी होती है। छात्रा स्मिता सिंह, आशीष सिंह व भूपेद्र सिंह ने बताया कि टायलेट दूर होने के कारण बाहर ही कहीं चले जाते हैं।
 इनका कहना है

जिले में एक साथ 17 नए भवनों के लिए राशि जारी हो चुकी है, जिनमें चैनटोला भी शामिल है। राशि न होने के कारण कार्य शुरु नहीं हो पाया था। अब राशि मिल चुकी है, शीघ्र ही भवन निर्माण शुरु होगा।
मदन त्रिपाठी, डीपीसी

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