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कम्युनिटी स्प्रेड हुआ तो कहाँ रखेंगे मरीज -प्रशासन का रुख अस्पष्ट

कम्युनिटी स्प्रेड हुआ तो कहाँ रखेंगे मरीज -प्रशासन का रुख अस्पष्ट

डिजिटल डेस्क जबलपुर । आज की स्थिति में प्रशासन के पास 4 सौ से ज्यादा एक्टिव मरीज हैं और जहाँ सवा सौ मरीज पिछले 24 घंटों में आए हैं, अगर ऐसा ही कुछ क्रम प्रारंभ हो गया तो बड़ी मुश्किल स्थिति उत्पन्न होने वाली है। अगर कम्युनिटी संक्रमण हुआ, जिसके संकेत दिख भी रहे हैं, तो मरीजों को कहाँ रखा जाएगा। प्रशासन के पास अधिकतम 1200 बेड का इंतजाम है। गंभीर मरीजों के लिए तो मात्र 64 बेड हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में हर कोई जा नहीं सकता। भोपाल, इन्दौर और उज्जैन में जब मरीजों की बाढ़ आई, वहाँ प्रशासन ने डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल बना डाले, जिसमें हजारों मरीजों को रखा जाने लगा। एक ही जगह इतने मरीज होने से इलाज भी बेहतर हुआ और चिकित्सकों का अनुभव भी बढ़ा। जगह-जगह कोविड मरीज रखने से हर जगह संक्रमण की आशंका बढ़ सकती है, चिकित्सा अधिकारी बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों से यह बात कह रहे हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। संक्रमण फैलने से एक निजी चिकित्सालय 3 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। ऐसा अगर होता रहा तो बाकी बीमारियों के मरीज कहाँ जाएँगे? 
प्रशासन का रुख अस्पष्ट
लॉकडाउन को लेकर प्रशासन के निर्णय जब चाहे तब बदल जाते हैं, ऐसे में कोविड को लेकर भी रुख स्पष्ट न रहना परेशानी बढ़ा सकता है। बताया जाता है कि एक अपर कलेक्टर कोविड बजट से केवल खरीददारी का काम देख रहे हैं। अब तक 7 करोड़ की खरीदी को अंजाम दे चुके हैं, पर क्या खरीदी की, यह बताने तैयार नहीं हैं। ये न तो अपने वरिष्ठ अधिकारियों का फोन उठाते हैं, न सांसद और विधायकों का। दरअसल प्रशासनिक अधिकारियों में भी समन्वय का अभाव है। कोई व्यापक जनहित वाले फैसले लेने तैयार नहीं है। इससे आने वाले समय में कोरोना के ऐसे काल का सामना करना पड़ सकता है, जब इलाज की समुचित व्यवस्था ही न मिले। 
 

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