Pune City News: अधिकार के दुरुपयोग पर 15 अधिकारियों को जबरन अवकाश

अधिकार के दुरुपयोग पर 15 अधिकारियों को जबरन अवकाश
  • पुणे समेत कई जिलों के अधिकारी शामिल
  • 38 हजार से अधिक मामलों की जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर

भास्कर न्यूज, पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने भूमि रिकॉर्ड में अनियमितताओं को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए 15 अधिकारियों को जबरन अवकाश पर भेज दिया है। यह कार्रवाई महाराष्ट्र भूमि राजस्व अधिनियम के दुरुपयोग के मामलों में प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद की गई है।

राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अवकाश पर भेजे गए अधिकारियों में से 11 वर्तमान में पुणे जिले में कार्यरत हैं, जबकि अन्य 4 अधिकारियों का तबादला मुंबई, कोल्हापुर, नाशिक और नागपुर जिलों में हो चुका है।

कंप्यूटरीकरण के दौरान अधिकारों का दुरुपयोग

जानकारी के मुताबिक, सातबारा उतारे के कंप्यूटरीकरण के दौरान त्रुटियों को सुधारने के लिए तहसीलदारों को विशेष अधिकार प्रदान किए गए थे। लेकिन जांच में यह सामने आया कि कुछ अधिकारियों ने इन अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए जमीन के वर्ग, क्षेत्रफल और स्वामित्व में अवैध बदलाव किए।

विशेष समिति की जांच में खुलासा

शिकायतों के आधार पर राज्य सरकार ने नाशिक के विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की थी। समिति ने कुल 38,027 मामलों की प्राथमिक जांच की, जिनमें से 2,337 मामलों के दस्तावेज उपलब्ध थे। इनमें 13 मामलों को अत्यंत गंभीर श्रेणी में रखा गया है। समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित मामलों में जानबूझकर कानून का दुरुपयोग कर जमीन के स्वामित्व अधिकारों में फेरबदल किए गए।

राज्य सरकार का सख्त रुख

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पहले ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया था। उसी के तहत राजस्व विभाग की कक्ष अधिकारी श्रद्धा मगर द्वारा आदेश जारी कर इन अधिकारियों को अगले आदेश तक जबरन अवकाश पर भेजा गया है। इस कार्रवाई में उपजिल्हाधिकारी, तहसीलदार, मंडल अधिकारी, राजस्व सहायक, ग्राम राजस्व अधिकारी और लिपिक स्तर के कर्मचारी शामिल हैं।

राज्य सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही दोषियों के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

Created On :   27 March 2026 3:05 PM IST

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