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Pune City News: जुन्नर में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, कर्मचारियों की भारी कमी से मरीज परेशान

भास्कर न्यूज, पुणे। जुन्नर तहसील में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण नागरिकों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्वीकृत पदों के मुकाबले कम नियुक्तियों से मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
तहसील में 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 73 उपकेंद्र कार्यरत हैं, जिनका संचालन पुणे जिला परिषद और जुन्नर पंचायत समिति द्वारा किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चिकित्सा अधिकारियों के 33 पदों में से 30 भरे हुए हैं, जबकि 3 पद अब भी रिक्त हैं।
स्वास्थ्य सेविकाओं की स्थिति सबसे खराब
स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे गंभीर स्थिति सेविकाओं की है। कुल 124 स्वीकृत पदों में से केवल 49 पर ही नियुक्ति हुई है, जबकि 75 पद खाली हैं। इसी तरह स्वास्थ्य सेवकों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के कई पद भी रिक्त हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
रात में डॉक्टरों की कमी, मरीजों को दिक्कत
कई डॉक्टर सरकारी आवास में नहीं रहते, जिसके कारण रात के समय मरीजों को डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाते। ऐसी स्थिति में नर्सें प्राथमिक उपचार देती हैं और गंभीर मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
जुन्नर तहसील के ओतूर में करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से बना ग्रामीण अस्पताल पिछले दो वर्षों से शुरू नहीं हो सका है। सभी सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उद्घाटन लंबित रहने से 30 से 40 गांवों के नागरिकों में नाराजगी है।
गंभीर मरीजों को इलाज के लिए नारायणगांव, आलेफाटा, मंचर या पुणे ले जाना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी और जोखिम बढ़ जाता है। ओतूर के ज्येष्ठ नागरिक संघ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ज्ञापन देकर अस्पताल जल्द शुरू करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि एक महीने में अस्पताल शुरू नहीं हुआ तो 1 मई, महाराष्ट्र दिवस से आमरण अनशन किया जाएगा।
अस्पताल परिसर में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। पोस्टमार्टम कक्ष में पानी की समस्या है, वहीं मुख्य भवन तक जाने वाले मार्ग पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात में मरीजों को परेशानी होती है।
जुन्नर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज ग्रामीण अस्पताल में भी 28 में से 6 पद खाली हैं, जिनमें दंत चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 13 संविदा पद भी रिक्त हैं। इसके बावजूद अस्पताल में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच यहां 55,560 मरीजों की ओपीडी जांच की गई, जबकि 2,094 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। इस दौरान 174 सामान्य प्रसव और 245 सर्जरी के जरिए प्रसव कराए गए, साथ ही 112 सर्पदंश के मामलों का सफल इलाज किया गया।
स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से रिक्त पदों को जल्द भरने, डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और ओतूर ग्रामीण अस्पताल को तुरंत शुरू करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके।
Created On :   27 March 2026 3:47 PM IST












