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Rewa News: बघेली काव्यपाठ में बघेली साहित्य की बिखरी सोंधी महक

डिजिटल डेस्क,रीवा। मानस भवन में बघेली काव्यपाठ का आयोजन किया गया जिसमें क्षेत्र के वरिष्ठ एवं युवा साहित्यकारों ने बघेली भाषा, लोकसंस्कृति और माटी की महक से ओत-प्रोत रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
काव्यपाठ में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कैलाश तिवारी, जगजीवन लाल तिवारी, भृगुनाथ पाण्डेय ‘भ्रमर’, डॉ. भारतेंदु मिश्र, राज कुमार शर्मा, नागेंद्र मणि मिश्र, गीता शुक्ला, हसमत रीवानी, अवध बिहारी पाण्डेय, रामकृष्ण द्विवेदी, अमित द्विवेदी, आशीष तिवारी ‘निर्मल’, सत्यम शुक्ला, आशीष खरे एवं विवेक नामदेव सहित अनेक रचनाकारों ने सहभागिता की। कवियों ने बघेली बोली में रचित अपनी कविताओं, गीतों और लोकभावना से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से विंध्य की संस्कृति, लोकजीवन, सामाजिक सरोकार, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के.डी. सिंह ज रहे। संचालन वरिष्ठ कवि भृगुनाथ पाण्डेय भ्रमर ने किया तथा आभार मानस मंडल रीवा के अध्यक्ष सुभाष बाबू पाण्डेय ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में बघेली भाषा की सहजता, मिठास और लोकजीवन से उसके गहरे जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा गया कि क्षेत्रीय बोलियां हमारी सांस्कृतिक पहचान और लोकस्मृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
बघेली काव्यपाठ जैसे आयोजन न केवल स्थानीय साहित्यकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। यह साहित्यिक आयोजन बघेली भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया। वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुभव और युवा रचनाकारों की ऊर्जा ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
Created On :   4 Oct 2026 7:07 PM IST












