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रीवा न्यूज: राजतंत्र के जमाने से लगातार किया जा रहा मंदिर प्रांगण में रामलीला का मंचन

डिजिटल डेस्क रीवा .
शहर के घोघर स्थित रानीगंज में स्थित सैकड़ो वर्ष पुराने नृत्य राघव शरण मंदिर परिसर में आगामी 5 अक्टूबर से भगवान श्री राम की रामलीला का मंचन किया जाना है इसके लिए विगत दिनों मुकुट पूजन का कार्यक्रम भी संपन्न हो चुका है. आयोजित हो रहे रामलीला के इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि यहां आयोजित रामलीला की परंपरा लगभग 186 वर्ष पुरानी है। इस ऐतिहासिक मंदिर में हर साल शारदीय नवरात्रि के दौरान बेहद भव्य और पारंपरिक रामलीला का मंचन किया जाता है, जो रीवा की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतीक है। जानकारों की माने तो इस रामलीला की शुरुआत तत्कालीन रीवा रियासत के महाराज रघुराज सिंह के शासनकाल में हुई थी। माना जाता है कि महाराज रघुराज सिंह एक बार काशी (वाराणसी) गए थे, जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध 'रामनगर की रामलीला देखी थी। महाराजा इस लीला से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने रीवा लौटकर वैसी ही भव्य रामलीला का मंचन शुरू करने का संकल्प लिया। बताया जाता है कि राजवंश के जमाने से शुरू हुई यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आज भी निभाई जा रही है। आज भी रामलीला के मंचन से पहले वैदिक रीति-रिवाज से मुकुट पूजन की परंपरा निभाई जाती है।जानकार बताते हैं कि अन्यत्र हो रहे हैं रामलीला से हटकर यहां की रामलीला का एक अलग ही पहचान है क्योंकि यहां की रामलीला ऐसी है जिसका मंचन कभी नहीं रुका। इस संबंध में नित्य राघव शरण मंदिर आयोजन समिति के अध्यक्ष सुभाष बाबू पांडे बताते हैं कि भारत-चीन युद्ध (1962) और भीषण प्राकृतिक आपदाओं के समय भी यहाँ रामलीला का मंचन कभी बंद नहीं हुआ बल्कि लगातार चलता रहा और आज भी अनवरत चल रहा है।
बढ़ता जा रहा मंदिर का धार्मिक महत्व
बताया जाता है कि जिस मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष रामलीला आयोजित होती है, वह स्वयं लगभग 450 से 500 वर्ष प्राचीन मंदिर है।इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान की नृत्य करती हुई मुद्रा में एक दुर्लभ मूर्ति स्थापित है, जिसे दुनिया में इकलौती माना जाता है। स्थानीय लोग इसे आम बोलचाल में 'बच्ची बाबा मंदिर' के नाम से भी जानते हैं।
आज भी जीवंत है पुरानी ऐतिहासिक परंपरा
सुभाष बाबू पांडे का कहना है कि तब से लेकर अब तक रामलीला का यह आयोजन उसी भक्ति-भाव के साथ जारी है। यहाँ स्थानीय कलाकारों (जैसे कजूरी मंडली व अन्य कला मंडल) द्वारा नृत्य राघव शरण मंदिर के विशाल मैदान में प्रतिदिन शाम से लेकर देर रात तक प्रभु श्री राम के चरित्र का मंचन किया जाता है। अब रामलीला को और भी भव्यता प्रदान की जा रही है। इसे देखने के लिए आज भी रीवा और आसपास के जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं
Created On :   4 Oct 2026 3:01 PM IST












