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रीवा न्यूज: लोक जैव विविधता पंजी का अद्यतन . भोपाल को भेजी गई जानकारी

डिजिटल डेस्क रीवा ।मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड भोपाल के सहयोग से शासकीय माधव सदाशिवराव गोलवलकर महाविद्यालय, रीवा के वनस्पति एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने रीवा, मऊगंज, हनुमना और नईगढ़ी जनपदों तथा रीवा की पाँच ग्राम पंचायतों — बहुरी बांध, कचूर, रीठी, मड़वा और पड़ोखर की लोक जैव विविधता पंजी का हाल ही में पूर्ण अद्यतन कर जैव विविधता प्रबंधन समिति की अनुशंसा सहित पूरी जानकारी राज्य जैव विविधता बोर्ड भोपाल को प्रेषित कर दिया है। इसका निर्णय जनपद नईगढ़ी में जैव विविधता प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया । इन्वेस्टिगेटर प्रोफेसर स्कंद मिश्रा के अनुसार यह पंजी स्थानीय पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों और वैज्ञानिक सूचनाओं का समेकित अभिलेख है, जो संरक्षण, योजना‑निर्माण और ग्रामीण विकास के कई आयामों के लिये मार्गदर्शक सिद्ध होगा। अद्यतन पंजी में क्षेत्रीय पारिस्थितिक तत्वों का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। जंगलों के प्रकार, कृषिगत पद्धतियाँ, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े आंकड़े तथा स्थानीय उपयोग‑प्रथाएँ साथ ही औषधीय पौधों, जड़ी‑बूटी विशेषज्ञों के ज्ञान, पूजा‑स्थलों व पवित्र उपवनों, परंपरागत उपचार पद्घतियों, जनजातिय ज्ञान और स्थानीय नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है जिससे सांस्कृतिक और जैविक विविधता के आपसी संबंधों का जीवंत चित्र मिलता है। जल स्रोतों, जलप्रपातों और अन्य प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को संरक्षित कर पर्यटन के माध्यम से स्थानीय आजीविका बढ़ाने के सुझाव भी पंजी में समाहित किए गए हैं। आर्थिक संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। पंजी में ऑर्गेनिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने, फूलों व मशरूम के उत्पादन में व्यावसायिक विकास के अवसरों को चिन्हित करने तथा आम और अन्य महत्वपूर्ण फलों के संवर्धन की संस्तुति की गई है। कृषि, उद्यानिकी, वन, पशुपालन, मत्स्य,पंचायत और शिक्षा विभागों के सहयोग से तैयार इस दस्तावेज़ ने स्थानीय अनुभवों को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हुए सामुदायिक परिप्रेक्ष्य को मजबूती दी है। इस सहयोग से निकली सिफारिशें अधिक व्यवहार्य, स्वीकार्य और क्रियान्वयन के अनुकूल मानी जा सकती हैं। भविष्य में इस लोक जैव विविधता पंजी का उपयोग अनेक प्रकार से संभव है। प्रो. स्कंद मिश्रा ने कहा कि
यह पंजी स्थानीय ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संगम है जिसका सीधा लाभ हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में होगा।
Created On :   26 Sept 2026 5:30 PM IST










