Bhopal News: शासन के नियमों की हुई अवहेलना, शिक्षा विभाग के 14 कर्मचारी सालों तक जमे रहे दूसरे दफ्तरों में, लिया 3.27 करोड़ वेतन-भत्ता

शासन के नियमों की हुई अवहेलना, शिक्षा विभाग के 14 कर्मचारी सालों तक जमे रहे दूसरे दफ्तरों में, लिया 3.27 करोड़ वेतन-भत्ता

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने नियम विरुद्ध दूसरे सरकारी दफ्तरों में सालों तक काम किया और वेतन-भत्ता स्कूल शिक्षा विभाग से ले लिया। इसे शासन ने नियम विरुद्ध माना है।

डीईओ, बीईओ और डीआईईटी के अलग-अलग चयनित कार्यालय के 14 कर्मचारी अन्य विभाग से संबंधित थे, जिनका वेतन और भत्ता का भुगतान शिक्षा विभाग को देना पड़ा। जबकि इन कर्मचारियों का चयन शिक्षा विभाग के लिए किया गया था, लेकिन दूसरे दफ्तरों में सेवाएं देते रहे। स्कूल शिक्षा विभाग ने शासन के आदेशों का उल्लंघन करते हुए 14 कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर करीब 3.27 करोड़ दे दिए। ये कर्मचारी दूसरे दफ्तरों में 2 से 20 साल तक जमे रहे लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने इन्हें वापस नहीं बुलाया। जिन कार्यालयों में ये 14 कर्मचारी जमे थे, उन कार्यालयों ने भी कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में नहीं भेजा। शासन के जारी निर्देशों की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से कर्मचारियों को 20 साल तक रखा और वेतन भत्ते भी दिए।

2018 से 2023 तक कर्मचारियों को अन्य विभागों में संलग्न रहे, इसके साथ ही बिना कार्य के अपने बजट से 3.27 करोड़ रुपए व्यय किये। इधर, शासन ने जवाब देते हुए कहा कि 22 अप्रैल 2025 को निर्देश जारी कर सभी का संलग्नीकरण रद्द कर दिया गया है। शहडोल में जिला पंचायत और कलेक्ट्रेट में 15-20 वर्षों तक 3 कर्मचारी पदस्थ रहे। जबकि इनका मूल कार्यालय डीआईईटी शहडोल और डीईओ शहडोल थी। इनको कुल 7510465 की राशि का भुगतान किया गया। इसी तरह अशोकनगर में 9 कर्मचारी, रतलाम और श्योपुर में एक कर्मचारी अन्य जगह पदस्थ रहे। ये कर्मचारी तहसील, कलेक्ट्रेट , जिला पंचायत या जिला पेंशन अधिकारी कार्यालय में पदस्थ रहे।

क्या है नियम?

सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 अगस्त 2000 को निर्देश जारी कर अधिकारियों और कर्मचारियों के संलग्नीकरण पर प्रतिबंध लगाया था। अन्य विभागों , कार्यालयों में संलग्न कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभाग और संगठन में वापस जाने का निर्देश दिया था। इसमे कहा गया था कि यदि कोई अधिकारी मूल कार्यालय के अलावा किसी अन्य कार्यालय में पदस्थ था तो उसका वेतन और भत्ता का भुगतान मूल कार्यालय करेगा तो यह अनियमित माना जाएगा। इसके साथ ही अगर अधिकारी संबद्ध अवस्था में बने रहते हैं तो सक्षम अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन शिक्षा विभाग ने नियमों की अनदेखी करते हुए वेतन और भत्ते दिए। इनको न ही मूल विभाग भेजा गया न ही अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।

सर्व शिक्षा अभियान में भी पैसे नहीं हुए खर्च

शिक्षा विभाग सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रशिक्षण के लिए दिए गए बजट का उपयोग ही नहीं कर सका। 2018 से 2023 यानी इन पांच सालों में 165 करोड़ बजट का आवंटन हुआ था, लेकिन व्यय मात्र 129 करोड़ ही कर पाए। 2020 से 2022 को छोड़ दिया जाए तो बाकी तीन सालों में कुल 35.71 करोड़ का बजट का उपयोग नहीं हुआ है। यानी 21.64 प्रतिशत बजट का उपयोग सर्व शिक्षा अभियान के तहत किया जाना था, लेकिन अधिकारियों ने इसका उपयोग नहीं किया। जिससे शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण का कार्य प्रभावित हुआ। विभाग ने माना कि कोविड की वजह से प्रशिक्षण कार्य प्रभावित हुआ।

Created On :   25 March 2026 8:22 PM IST

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