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चैत्र माह: हिन्दू नववर्ष की शुरुआत, इस माह में आएंगे ये व्रत और त्यौहार

चैत्र माह: हिन्दू नववर्ष की शुरुआत, इस माह में आएंगे ये व्रत और त्यौहार

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन के अगले ही दिन से चैत्र महीना शुरू हो जाता है। यह हिन्दू कैलेंडर का प्रथम माह है और इसी दिन से हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है। इस बार चैत्र माह की शुरुआत 10 मार्च से हो चुकी है। इस माह में कई सारे व्रत और त्यौहार आते हैं। विक्रम संवत की चैत्र शुक्ल की पहली तिथि से न केवल नवरात्रि में दुर्गा व्रत-पूजन का आरंभ होता है, बल्कि राजा रामचंद्र का राज्याभिषेक, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक, सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म हुआ था।

प्राचीन काल में दुनिया भर में मार्च को ही वर्ष का पहला महिना माना जाता था। आज भी बहीखाते का नवीनिकरण और मंगल कार्य की शुरुआत मार्च में ही होती है। ज्योतिष विद्या में ग्रह, ऋतु, मास, तिथि एवं पक्ष आदि की गणना भी चैत्र प्रतिपदा से ही की जाती है। मार्च से ही सूर्य मास के अनुसार मेष राशि की शुरुआत भी मानी गई है। 

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चैत्र शुक्ल पक्ष के त्यौहार 
- शुक्ल तृतीयों को उमा, शिव तथा अग्नि का पूजन करना चाहिए। 
- शुक्ल तृतीया को दिन मत्स्यजयन्ती मनानी चाहिए, क्योंकि यह मन्वादि तिथि है। 
- चतुर्थी को गणेशजी का पूजन करना चाहिए। पंचमी को लक्ष्मी पूजन तथा नागों का पूजन।
- षष्ठी के लिए स्वामी कार्तिकेय की पूजा।
- सप्तमी को सूर्यपूजन।
- अष्टमी को मां दुर्गा का पूजन और इस दिन का ब्रह्मपुत्र नदी में स्नान करेन का महत्व भी है।
- नवमी को भद्रकाली की पूजा करना चाहिए।

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- दशमी को धर्मराज की पूजा।
- शुक्ल एकादशी को कृष्ण भगवान का दोलोत्सव अर्थात कृष्णपत्नी रुक्मिणी का पूजन।
- द्वादशी को दमनकोत्सव मनाया जाता है।
- त्रयोदशी को कामदेव की पूजा। चतुर्दशी को नृसिंहदोलोत्सव, एकवीर, भैरव तथा शिव की पूजा।
- अंत में पूर्णिमा को मन्वादि, हनुमान जयंती तथा वैशाख स्नानारम्भ किया जाता है। वैसे वायु पुराणादि के अनुसार कार्तिक की चौदस के दिन हनुमान जयन्ती अधिक प्रचलित है। चैत्र मास की पूर्णिमा को 'चैते पूनम' भी कहा जाता है।

चैत्र कृष्ण पक्ष के त्यौहार 
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचिनी एकादशी कहते हैं। वहीं चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। शीत ऋतु की शुरुआत आश्विन मास से होती है, इसलिए आश्विन मास की दशमी को 'हरेला' मनाया जाता है। ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत चैत्र मास से होती है, सो चैत्र मास की नवमी को हरेला मनाया जाता है।

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